पूरी हुई केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल की ग्राम स्वराज यात्रा, रास्ते में लगाए गए 2000 पौधे

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री प्रह्लाद पटेल (Prahlad Patel) की ग्राम स्वराज पदयात्रा (Village Swaraj Padyatra) दमोह में पूरी हो गई. 87 किलोमीटर के यात्रा मार्ग पर लगभग 2000 पौधे लगाए गए.

Dharmendra | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 19, 2019, 10:18 PM IST
पूरी हुई केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल की ग्राम स्वराज यात्रा, रास्ते में लगाए गए 2000 पौधे
प्रह्लाद पटेल
Dharmendra | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 19, 2019, 10:18 PM IST
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री प्रह्लाद पटेल (Prahlad Patel) की ग्राम स्वराज पदयात्रा (Village Swaraj Padyatra) दमोह में पूरी हो गई. 87 किलोमीटर के यात्रा मार्ग पर लगभग 2000 पौधे लगाए गए. यात्रा का समापन बजरिया तीन हरिजन बस्ती के उसी गुरूद्वारे में स्थापित गांधी प्रतिमा के सामने पहुंच कर किया गया जिसकी आधारशिला 2 दिसंबर 1930 को महात्मा गांधी ने रखी थी. समापन के इस मौके पर गांधी के प्रपोत्र श्रीकृष्ण कुलकर्णी शामिल हुए.

दमोह से बीजेपी सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल ने अपने इलाके में 4 दिन पदयात्रा की. सोमवार को यात्रा के अंतिम दिन खोजाखेड़ी से उनका कारवां शुरू हुआ. रास्ते भर उन्होंने कई जगह पौधे रौंपे. सागर जिले के गांधीग्राम अनंतपुरा से यात्रा शुरू हुई थी. सागर से दमोह तक के इस 87 किलोमीटर के यात्रा मार्ग पर करीब 2000 पौधे लगाए गए. इनकी देखभाल की जिम्मेदारी गांव वालों को दी गई है.



राजगोपाल हुए शामिल

प्रह्लाद पटेल की इस स्वराज यात्रा के समापन में और गांधी के प्रपोत्र श्रीकृष्ण कुलकर्णी और गांधीवादी चिंतक और विचारक राजगोपाल शामिल हुए. उन्होंने कहा कार्यकर्ता क्लास रूम में नहीं सड़क पर बनते हैं. गांधी की तीन बातों को ध्यान में रखा जाए तो देश में व्यापक बदलाव हो सकता है. उन्होंने इसे गांधी का ताबीज नाम देते हुए स्पष्ट कहा- जब भी कोई योजना बनाएं- कतार के सबसे अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखे. दूसरा आवश्यकता से अधिक का लालच मिटाएं और तीसरा सफलता जरूरी है लेकिन उसका रास्ता भी सही होना चाहिए.

गुरुद्वारे में समापन
ग्राम स्वराज पदयात्रा का समापन बजरिया तीन हरिजन बस्ती के उसी गुरूद्वारे में स्थापित गांधी प्रतिमा पर हुआ जिसकी आधारशिला 2 दिसंबर 1930 को महात्मा गांधी ने रखी थी. गांधी ने इसके लिए 7 हजार 811 रुपए का चंदा इकट्ठा किया था और अपनी ओर से 200 रुपए दिए थे.
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महात्मा गांधी के प्रपोत्र श्रीकृष्ण गांधी ने उम्मीद जताई कि गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित कर भगवान बनाने की जगह अगर उनके विचारों को लेकर कार्यान्जली दी जाए तो देश में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है. अहिंसा को बहुत सीमित अर्थों में देखा गया है जबकि आवश्यकता से अधिक हासिल करने की प्रवृत्ति ही हिंसा है. इसे रोकना होगा तभी नीचे के तबके के लोगों तक सुविधाएं पहुंचे पाएंगी.

(दमोह से धर्मेश की रिपोर्ट)

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First published: August 19, 2019, 7:32 PM IST
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