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अक्षय तृतीया पर हो रहा था बाल-विवाह, प्रशासन पहुंचा तो मचा हाहाकार

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जागेश्वरनाथ के दरबार में शादियों के मुहूर्त में बड़े पैमाने पर शादियां होती है और इस जगह पर महिला बाल विकास विभाग और बाल कल्याण विभाग की खास नजर रहती है.

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मध्यप्रदेश में तमाम कोशिशों और जनजागरण अभियान चलाए जाने के बाद भी लोग बाल विवाह से परहेज नहीं कर पा रहे है. एक बार फिर तीन बाल विवाह किए जाने की कोशिश की गई है. लेकिन प्रशासन की सतर्कता की वजह से आखिरकार ये तीनों शादियां रोक दी गई.

पहला मामला दमोह जिले के प्रसिद्द तीर्थक्षेत्र बांदकपुर का है. जहां जागेश्वरनाथ के दरबार में शादियों के मुहूर्त में बड़े पैमाने पर शादियां होती है और इस जगह पर महिला बाल विकास विभाग और बाल कल्याण विभाग की खास नजर रहती है. बाल विवाह की संभावनाओं के बीच एक बार फिर अधिकारीयों की टीम ने जांच पड़ताल की तो सैकड़ों शादियों के बीच दो जोड़ें नाबालिग दिखे और फिर टीम ने जांच पड़ताल की तो उनका शक सही निकला.

पहला जोड़ा गुजरात के भावनगर से यहां पहुंचा था. जिसमे लड़के और लड़की नाबालिग मिले, जबकि दूसरा जोड़ा सागर जिले से यहां शादी करने आया था. अधिकारियों ने जब बाल विवाह रोकने की कोशिश की तो पहले बारातियों और अफसरों में तनातनी हुई और फिर उन्हें मानना पड़ा की नाबालिग की शादी नहीं की जाए.



बताया जा रहा है कि दोनों जोड़ों के दस्तावेज भी फर्जी तैयार किये गए थे. अगर मामले में कोई जांच करता तो तुरंत में दस्तावेजों के आधार पर मामला निपटाया जा सके. हालंकि अफसरों ने दस्तावेज फर्जी पाए और दोनों शादियां रुकवा दी गई है
(दमोह से आशीष जैन की रिपोर्ट)
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