रिपोर्ट: अर्पित बड़कुल
दमोह: जिले की तेंदूखेड़ा तहसील के सैलवाड़ा से 5 किलोमीटर दूर धरी ग्राम में स्थित दिव्य सिद्ध किशनगढ़ धाम सिद्धों की तपोभूमि के नाम से प्रसिद्ध है. सद्गुरु देव दादा जी सरकार ने इस सिद्ध क्षेत्र किशनगढ़ धाम में तपस्या की और ईश्वरीय महिमा का प्रत्यक्ष उदाहरण यहां आज भी मौजूद है. जहां विशालकाय चट्टानों से हमेशा जल धारा निकलती रहती है.
पत्थर के बीचो बीच बने इस कुंड में पानी कहां से आता है, इसका पता आज तक कोई भी नहीं लगा पाया है. पत्थरों में किसी प्रकार का कोई छेद भी नजर नहीं आता है. फिर भी बारह महीने इस कुंड से पानी बहता रहा है, जो कभी समाप्त नहीं होता. इसे ईश्वरीय शक्ति कहें या सिद्धों की तपस्या, लगातार कुंड में से पानी का रिसाव होता ही रहता है.
गर्मियों में बढ़ जाता है जलस्तर
पत्थरों से निकलने वाला यह पानी पास ही बने दूसरे बड़े कुंड में एकत्रित हो जाता है, जिससे पशु-पक्षियों और भी वन्यजीव, जंतुओं की प्यास बुझती है. ग्रामीणों ने इस कुंड को भगवान का चमत्कार बताया. कुछ लोगों ने सद्गुरु देव दादा जी सरकार की तपस्या का फल बताया. ऐसा माना जाता है कि जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप बढ़ता है, वैसे-वैसे कुंड में पानी का स्तर बढ़ता जाता है. जंगल में स्थित होने के चलते पहले के बुजुर्ग बताते हैं कि उस दौर में नीचे बनी गुफाओं में शेर भी रहा करते थे. रात्रि के समय जब दादा जी सरकार तपस्या करते थे जब जंगली जानवरों का भी दादा जी सरकार के आसपास घेरा डाले रहते थे.
कभी समाप्त नहीं होता पानी
स्थानीय निवासी रघुनाथ यादव ने बताया कि वह सिद्ध क्षेत्र किशनगढ़ धाम है जिसे तपोस्थली भी कहा जाता है वहां एक पत्थर के बीच में से पानी निकलता है जो कभी समाप्त नहीं होता है. वहीं स्थानीय शिक्षक राम प्रसाद गोटिया ने बताया कि इस क्षेत्र को सिद्धों की तपोभूमि कहा जाता है, जहां नीचे शेरों की गुफाएं हैं. वहां शेर रहा करते थे. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है वैसे-वैसे कुंड में भी पानी बढ़ता जाता है.
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