ऐसा है इस सीट का इतिहास, यहां से चुने गए सांसद बाद में विधायक बन गए

हाल के विधानसभा चुनाव में ऊंटवाल ने विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत गए. 2014 में सांसद का चुनाव हारे सज्जन सिंह वर्मा भी विधानसभा चुनाव लड़े और वो भी जीतकर कमलनाथ सरकार में मंत्री बन गए.

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: March 18, 2019, 8:03 PM IST
ऐसा है इस सीट का इतिहास, यहां से चुने गए सांसद बाद में विधायक बन गए
सांकेतिक तस्वीर
Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: March 18, 2019, 8:03 PM IST
मध्यप्रदेश की देवास-शाजापुर लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला रोचक होने वाला है. यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है. विधानसभा चुनाव के परिणामों ने सीट के सियासी समीकरण को बदलकर रख दिया है. मौजूदा चेहरों की विधानसभा में एंट्री होने की वजह से अब बीजेपी और कांग्रेस, लोकसभा के लिए नए चेहरे की तलाश में हैं.

परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई देवास लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं. वर्ष 2009 में कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा ने यहां जीत दर्ज की थी. उसके बाद 2014 के चुनाव में भाजपा नेता मनोहर ऊंटवाल ने सज्जन सिंह वर्मा को हरा कर चुनाव जीता. हाल के विधानसभा चुनाव में ऊंटवाल ने विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत गए. वर्ष 2014 में सांसद का चुनाव हारे सज्जन सिंह वर्मा भी विधानसभा चुनाव लड़े और वो भी जीतकर कमलनाथ सरकार में मंत्री बन गए. इस तरह लोकसभा सीट के ये दो परंपरागत प्रतिद्वंद्वी अब विधायक बनकर विधानसभा में जा चुके हैं.

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वर्ष 2014 के लोकससभा चुनाव में मनोहर उंटवाल ने कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा को 26,03,13 वोटों से हराया था. संसदीय क्षेत्र में शाजापुर और देवास जिले की तीन-तीन, आगर और सीहोर जिले की एक-एक विधानसभा सीट आती हैं. बीजेपी के पास मनोहर ऊंटवाल और कांग्रेस के पास सज्जन सिंह वर्मा के अलावा कोई दूसरा मंजा हुआ चेहरा नहीं है. इसलिए दोनों ही दलों के लिए जिताऊ उम्मीदवार ढूंढ़ना बड़ी चुनौती है.

ये है सियासी समीकरण?
-पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस देवास-शाजापुर संसदीय क्षेत्र की आठों विधानसभा सीटों पर वोट संख्या में पिछड़ गई थी.
-कांग्रेस ने हाल के विधानसभा चुनाव में सोनकच्छ, हाटपिपल्या, शाजापुर और कालापीपल सीट जीतकर वोट प्रतिशत बढ़ाया है. वर्ष 2014 में पार्टी जहां 2.60 लाख वोटों से पीछे थी, वहां अब करीब 40 हजार वोटों से भाजपा से आगे दिखाई दे रही है.
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-घटती सीट और गिरते वोट प्रतिशत की वजह ने बीजेपी की टेंशन को बढ़ा दिया है.
-कांग्रेस ने इसी संसदीय क्षेत्र के दो विधायकों को मंत्री बनाकर अपनी पकड़ को मजबूत किया है.
-संसदीय सीट में बेरोज़गारी, रेलवे लाइन, सड़क, औद्योगिक क्षेत्र की समस्या है.

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प्रदेश की एक-एक लोकसभा सीट कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए ही महत्वपूर्ण है.बीजेपी हो या फिर बीजेपी,दोनों ही इस बार देवास सीट पर उन्हीं नए चेहरों को मौका देगी, जो पार्टी के लिए जिताऊ होंगे.

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First published: March 18, 2019, 4:11 PM IST
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