प्लास्टिक बीनने वाले का बेटा एम्स में हुआ सेलेक्ट, राहुल और शिवराज ने दी बधाई
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प्लास्टिक बीनने वाले का बेटा एम्स में हुआ सेलेक्ट, राहुल और शिवराज ने दी बधाई
अपने माता-पिता के साथ आसाराम चौधरी (Photo-News18)

मुख्यमंत्री शिवराज ने ना सिर्फ छात्र को बधाई दी थी बल्कि यह भी ऐलान किया है कि सरकार एम्स की फीस भी माफ करेगी और छात्र के परिवार को घर और शौचालय भी बना कर देगी

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मध्य प्रदेश के देवास जिले में कचरे में से पास्टिक बीनकर घर चलाने वाले पिता के बेटे का चयन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) की प्रवेश परीक्षा में हो गया है. छात्र को पहले एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बधाई दी उसके बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी पत्र लिखकर छात्र को बधाई दी है.

देवास जिले की विजयागंज मंडी में प्लास्टिक बीनने वाले रंजीत चौधरी के पुत्र आसाराम चौधरी ने प्रतिष्ठित एम्स कि मेडिकल एग्जाम पास किया है. इस खबर के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ना सिर्फ छात्र को बधाई दी थी बल्कि मुख्यमंत्री शिवराज ने यह भी ऐलान किया है कि सरकार एम्स की फीस भी माफ करेगी और छात्र के परिवार को घर और शौचालय भी बना कर देगी. इसके अलावा शनिवार को देवास कलेक्टर डॉक्टर श्रीकांत पांडे ने रेडक्रास सोसायटी की ओर से युवक आसाराम चौधरी को 25 हजार का चेक भी प्रदान किया था.

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक पत्र लिखकर उन्हें बधाई दी. राहुल ने अपने पत्र में लिखा कि आपसे दूसरे बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी. इसके अलावा अपोलो अस्पताल ने भी 20 हजार रुपए देकर आशाराम की आर्थिक मदद की है.



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प्रवेश परीक्षा में साढ़े चार लाख परीक्षार्थियों के बीच 707वीं अखिल भारतीय और ओबीसी श्रेणी के दो लाख विद्यार्थियों के बीच 141वीं रैंक हासिल की है. आसाराम ने जोधपुर के एम्स में एमबीबीएस में दाखिला ले लिया है और सोमवार 23 जुलाई से उनकी कक्षाएं शुरू होंगी.

सफलता बनी मिसाल
देवास से 40 किमी दूर विजयागंज मंडी में रंजीत चौधरी और ममता बाई के पुत्र आसाराम माता पिता के साथ झोपड़ी में रहते हैं और वहीं रहकर पढ़ाई करते थे. उनके पिता रंजीत के पास कोई जमीन नहीं थी इस वजह से वे पन्नी और खाली बोतलें बीनने के अलावा कभी-कभी खेतों में मजदूरी करते हैं. मां गृहिणी हैं.
आसाराम की सफलता पर पिता रंजीत कहते हैं कि मेरे लिए तो यह सब सपने जैसा है, क्योंकि इतना तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था. आसाराम की पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई है.

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