जानिए- कौन हैं प्रहलाद टिपानिया, जिन्हें कांग्रेस ने देवास से बनाया है अपना उम्मीदवार

प्रहलाद टिपानिया (File Photo)
प्रहलाद टिपानिया (File Photo)

अंतरराष्ट्रीय कबीर भजन गायक प्रहलाद टिपानिया को 2011 में सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा था. राजनीति से उनका ज्यादा निकट का नाता नहीं है.

  • Share this:
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के जिन प्रत्याशियों की सूची जारी की है उनमें 6 नाम बिल्कुल नए हैं. इनमें सबसे खास हैं देवास-शाजापुर संसदीय सीट से प्रत्याशी बने प्रहलाद टिपानिया. देवास सीट पर कांग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय कबीर भजन गायक प्रहलाद टिपानिया को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. टिपानिया उज्जैन जिले के लुनियाखेड़ी गांव के निवासी हैं, जो शाजापुर और मक्सी की निकट है. आइए जानते हैं- कौन हैं कांग्रेस के प्रहलाद टिपानिया, जिन्हें सर्वे के आधार पर कांग्रेस ने चुना है.

विज्ञान के शिक्षक भी रह चके हैं प्रहलाद सिंह टिपानिया
प्रहलाद टिपानिया ने कबीर के भजनों को गाने की शुरुआत लूणियाखेड़ी गांव (मध्य प्रदेश के देवास में) से ही की. प्रहलाद टिपानिया पेशे से गायक होने के अलावा विज्ञान के शिक्षक भी हैं. कबीर के भजनों के लिए जाने जाने-वाले प्रहलाद टिपानिया अमरीका समेत विदेशों में भी शो करते हैं. विदेशों में प्रहलाद टिपानिया के गायन पर मोहित होने वालों की हद यहां तक है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर सारा भारत आकर उनकी शिष्य बनीं. साथ ही अपना नाम बदलकर अंबा सारा रखा. वे कबीर के भजनों का अंग्रेजी में अनुवाद कर रही हैं.

मिल चुका है पद्मश्री
अंतरराष्ट्रीय कबीर भजन गायक प्रहलाद टिपानिया को 2011 में सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा था. राजनीति से उनका ज्यादा निकट का नाता नहीं है. हालांकि उनके पिता कांग्रेस से जुड़े रहे हैं. उनके एक भाई जनपद में प्रतिनिधि रह चुके हैं. उनका बेटा विजय कांग्रेस आईटी सेल का तराना ब्लॉक का अध्यक्ष रह चुका है.



बलई समाज से आते हैं प्रहलाद टिपानिया
प्रहलाद टिपानिया बलई समाज से हैं. देवास लोकसभा क्षेत्र में प्रहलाद टिपानिया अपने समाज का लोकप्रिय चेहरा हैं. इस क्षेत्र में 3.50 लाख वोटर्स बलई हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां ढाई लाख वोट से हारी थी. लेकिन हाल के विधानसभा चुनाव में 40 हजार वोटों की बढ़त उसे मिली थी.

बता दें, पिछले 30 साल में देवास सीट पर कांग्रेस के सज्जनसिंह वर्मा की वजह से सिर्फ एक बार 2009 में जीती थी. तब जीतने वाले सज्जनसिंह वर्मा भी 2014 में मोदी लहर में ढाई लाख से ज्यादा वोटों से हारे थे.

ये भी पढ़ें-

लोकसभा चुनाव 2019: एमपी में कांग्रेस की सात सीटों का ये है सस्पेंस

भोपाल सीट का घमासान: दिग्विजय के खिलाफ शिवराज को लड़ाने के पक्ष में मौजूदा सांसद!

MP: खेत में लगी आग के चपेट में आए कई गांव, हजारों एकड़ फसल बर्बाद, 3 की मौत

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी WhatsApp अपडेट्स
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज