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Navratri: मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के पान का बीड़ा चढ़ाने से होती है मन्नतें पूरी, जानें अनसुनी कहानी

Navratri: मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के पान का बीड़ा चढ़ाने से होती है मन्नतें पूरी, जानें अनसुनी कहानी

मप्र के देवास जिले में मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी की मंदिर है. नवरात्रि में इस स्थल का महत्व बहुत बढ़ जाता है.

मप्र के देवास जिले में मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी की मंदिर है. नवरात्रि में इस स्थल का महत्व बहुत बढ़ जाता है.

Madhya Pradesh: एमपी के देवास जिले को देववासिनी भी कहा जाता है. यहां मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी का मंदिर है. नवरात्रि में इस मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. कहा जाता है कि जो भी यहां 7 दिन लगातार पान का बीड़ा चढ़ाता है, उसकी मान्यता जरूर पूरी होती है.

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देवास. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के देवास (Dewas) जिले में स्थापित है मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी का मंदिर. वैसे तो इस मंदिर में सालभर भक्तों की भीड़ रहती है. लेकिन, नवरात्रि में इस मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. मान्यता है कि जो भी यहां 7 दिन लगातार पान का बीड़ा चढ़ाता है, उसकी मान्यता जरूर पूरी होती है.

मंदिर के पंडित अनिल मिश्र बताते हैं कि मां तुलजा भवानी और मां चामुण्डा दिन में तीन रूप बदलती हैं. दोनों देवियों के सुबह में बाल, दोपहर में जवान और रात में वृद्ध रूप देखे जा सकते हैं. यहां स्थित बड़ी माता मंदिर पर उल्टा सातिया भी बनाया जाता है. इस सतिये को मन्नतें पूरी होने पर सीधा किया जाता है. यह देवास माता की टेकरी पर किया जाता है.

राजवंश परिवार की कुल देवी

गौरतलब ह कि मां चामुंडा पवार राजवंश की कुल देवी हैं. राजवंश अष्टमी के दिन मां की पूजा करता है. यहां पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं. ऐसा बताया जाता है के ये देवियां गुरु गोरखनाथ की इष्ट देवियां हैं. इसके अलावा बताया जाता है कि इस तपोस्थल पर विक्रमादित्य के भाई राजा भृतहरि ने भी तपस्या की थी. उनकी तपोस्थली की अन्य गुफाएं उज्जैन में भी हैं.

पृथ्वीराज चौहान की पूजा स्थली

मंदिर के पंडित अनिल मिश्र बताते हैं कि यहां राजा पृथ्वीराज चौहान भी शीश झुकाते थे. इस पावन स्थल पर सद्गुरू शीलनाथ महाराज ने भी 20 वर्ष तपस्या की है. देशभर से भक्त यहां अनादिकाल से शक्ति की उपासना करने आ रहे हैं. गौरतलब है कि देवास का एक और नाम देववासिनी भी है.

जानें श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की सही विधि

नवरात्रि के दौरान माता का हर भक्त श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करना चाहता है. बहुत से लोग इस पाठ को करते भी हैं लेकिन जानकारी की कमी के चलते पूजन की सही विधियों का ध्यान नहीं रख पाते हैं और पूर्ण फल से वंचित रह जाते हैं. श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ की धर्मग्रंथों में कई विधियां कही गई हैं.

इस विधि से करें श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रारंभ करने से पहले प्रथम आराध्य श्रीगणेश जी, शिवजी, विष्णुजी, माता जगदंबा आदि देवी-देवताओं का स्मरण कर उनकी पूजा कर लेनी चाहिए. इसके बाद पुस्तक का पूजन करें. इसकेलिए पुस्तक पर जल छिड़ककर स्नान भाव से स्नान कराएं. इसके बाद धूप-दीप, पुष्प आदि पवित्र पुस्तक पर समर्पित करें. जब भी श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करें तो उस वक्त पुस्तक को मां भगवती का स्वरुप ही मानना चाहिए.

Tags: Dewas News, Mp news, Navratri 2021

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