शौहर ने फोन पर दिया तीन तलाक, महिला ने पीएम मोदी को खून से लिखा खत

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निकहत जैसी ऐसी कई महिलायें है जिनको ट्रिपल तलाक एक नासूर की तरह है. एक ऐसा कांटा जो उन्हें ज़िन्दगी भर के लिये दर्द दे गया है.

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  • Last Updated: March 28, 2018, 11:54 AM IST
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मध्य प्रदेश के देवास की एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला ने पीएम नरेन्द्र मोदी को ट्रिपल तलाक के खिलाफ़ अपने खून से खत लिखा है. महिला ने लिखा है कि वो तलाक की वजह से छह साल से परेशान है. पुलिस, प्रशासन औऱ अदालत के ज़रिये उसकी परेशानी खत्म नहीं हो पा रही है.

देवास की निकहत खान नाम की महिला ने खून से लिखा खत प्रधानमंत्री को भेजा है. दोनो परिवारो की रजामंदी से निकहत का निकाह 15 मई 2011 को जावेद से हुआ था. निकाह के छह महीने बाद जब निकहत गर्भवती थी तब उसके शौहर ने उसे घर से निकाल दिया.

खून से लिखे इस खत का मजमून देखिये...
माननीय प्रधानमंत्री जी...मैं अपने खून से खत लिख रही हूं. सच लिख रही हूं. आपकी सरकार में आये तलाक के कानून को मैंने सुना तो मैं अपनी पीड़ा आपको इस खत के ज़रिये बताने जा रही हूं. मेरे साथ तलाक के नाम पर घोर नाइंसाफी हुई है. मेरा ना पुलिस ने साथ दिया ना ही कोर्ट ने. मोदी जी एक आपसे ही उम्मीद करती हूँ कि मुझे आप इंसाफ दिलायेंगे.
एक बेबस निकहत खान




निकहत के परिवार ने समझौते की कोशिश की. उसके बाद एक दिन जावेद ने निकहत को फोन पर तलाक तलाक तलाक कह दिया, जब निकहत के माता-पिता ने पुलिस से शिकायत की. पुलिस ने भी राज़ीनामें की नाकाम कोशिश की. मगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की. निकहत ने पांच साल पहले कलेक्टर की जनसुनवाई में अर्ज़ी लगाई. हर जगह नतीजा सिफर. पीएम मोदी ही अब निकहत की आखिरी उम्मीद हैं.

कलेक्टर-एसपी को भी अर्ज़ी दी तो मैंने अब मोदी सर को अपने खून से लेटर लिखा है. मैंने अपनी परेशानी लिखी कि मैं छह साल से परेशान हूं.


निकहत का 6 साल का बेटा है. पिता के साथ रहते हुये कपड़े सिलकर निकहत अपना गुजारा कर रही है. बीते सालों में निकहत के शौहर जावेद की तरफ से कोर्ट से तलाक के नोटिस आते रहे. जब निकहत ने नोटिस लेने से मना किया तो पुलिस ने ज़बरदस्ती नोटिस थमा दिया. निकहत की तरफ से अदालत में लगाया केस पर भी तारीख़ पर तारीख़ लगती रही. हद तो तब हो गई जब निकहत के तलाक दिए बगैर पति जावेद ने शरियत के खिलाफ़ जाते हुये दूसरा निकाह कर लिया.

निकहत खान मेरी शादी हुई औऱ मेरे शौहर ने मुझे तलाक दे दिया. कोर्ट में केस चल रहा लेकिन वहां से भी कोई निराकरण नहीं हुआ. 15 मई 2011 में शादी हुई. कहा कि पांच लाख औऱ बेटे के नाम एफडी कराऊंगा वो नहीं हुई.


सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को अब गैरकानूनी बना दिया है. लेकिन निकहत जैसी ऐसी कई महिलायें है जिनको ट्रिपल तलाक एक नासूर की तरह है. एक ऐसा कांटा जो उन्हें ज़िन्दगी भर के लिये दर्द दे गया है.
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