MP by Election 2020 : बदनावर के कानवन में क्या कमजोर पड़ रही है BJP!

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कांग्रेस (Congress) प्रत्याशी कमल सिंह पटेल बदनावर के कानवन के रहने वाले हैं. क्या बीजेपी (BJP) ने भी यह मान लिया कि इस क्षेत्र में वह कमजोर साबित हो रही है. शिवराज सिंह चौहान को बदनावर की बजाय ग्राम कानवन में जनसभा क्यों करना पड़ी

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धार. जैसे जैसे मतदान (Voting) की तारीख नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे बदनावर में चुनावी समीकरण भी तेज़ी से बदलते जा रहे हैं. कुछ प्रत्याशियों (Candidate) की ज़मीन मज़बूत हो रही है तो कुछ के मुगालते भी दूर होते दिखाई दे रहे हैं. इसीलिये अब वे बड़े नेताओं की जनसभा करवाकर मतदाताओं को प्रभावित करने में लगे हुए हैं.

धार की बदनावर विधानसभा सीट पर मुकाबला अब दिलचस्प होता जा रहा है. यहां पहले कांग्रेस ने अभिषेक सिंह टिंकू पर विश्वास जताते हुए उन्हें टिकट दिया था लेकिन उनका विरोध होता देख कांग्रेस ने प्रत्याशी बदल दिया. अब कमल सिंह पटेल यहां से कांग्रेस उम्मीदवार हैं. उनका मुकाबला अब बीजेपी के हो चुके राजवर्धन सिंह दत्तीगांव से है. कमल सिंह पटेल वही नेता हैं जो कभी राजवर्धन सिंह के साथ उनकी चुनावी बागडोर संभालते थे. लेकिन अब हालात कुछ अलग हैं. कमल सिंह पटेल बदनावर के ग्राम कानवन के निवासी हैं. कानवन और उसके आसपास के इलाकों में उनकी मजबूत जमीनी पकड़ है.तो क्या बीजेपी ने भी यह मान लिया कि इस क्षेत्र में वह कमजोर साबित हो रही है. शिवराज सिंह चौहान को बदनावर की बजाय ग्राम कानवन में जनसभा क्यों करना पड़ी. ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जबाव भी इन्हीं सवालों में छुपे हुए हैं.

क्या कानवन में कमज़ोर है बीजेपी
बीजेपी प्रत्याशी राजवर्धनसिंह दत्तीगांव इस क्षेत्र में पहले ही जनसंपर्क कर चुके थे. लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि ग्राम कानवन में  सीएम शिवराज सिंह चौहान को आना पड़ा. उनकी जनसभा तो बदनावर में होना चाहिये थी, क्योंकि बदनावर सेंटर में पड़ता है और इसके आसपास के क्षेत्रों के सभी लोगों को बदनावर आने में सुविधा रहती है. लेकिन शिवराज सिंह चौहान की जनसभा ग्राम कानवन में रखी गई , इससे जाहिर होता है कि इस बेल्ट में बीजेपी अपने आप को कमजोर महसूस कर रही है.
कांग्रेस को है विश्वास


उधर कांग्रेस मान रही है कि कमल सिंह पटेल की पूरे क्षेत्र में मज़बूत पकड़ है. वे जमीन से जुड़े हैं और उन्हें जन समर्थन मिल रहा है. उससे बीजेपी घबरा रही है. अब बीजेपी अपने आप को कमजोर महसूस कर रही है. यही वजह है कि छोटे छोटे कस्बों में बीजेपी के बड़े नेता जनसभाएं कर मतदाताओं को प्र‌भावित करने का प्रयास कर रहे हैं.

सीधी टक्कर
बदनावर उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है. यहां आये दिन चुनावी समीकरण बदल रहे हैं. जैसे जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है , वैसे वैसे दोनों ही पार्टियों की सांस उपर नीचे हो रही है. बीजेपी के बड़े नेताओं की सभा अब ऐसे छोटे-छोटे गांव- कस्बों में भी हो रही हैं जहां इन्हें लग रहा है कि हम यहां से कमजोर हैं. बहरहाल , ये तो जनता ही तय करेगी कि वह किस प्रत्याशी पर विश्वास करके विधानसभा में भेजती है.
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