ये है भारत की नई बैडमिंटन सनसनी, कभी नहीं थे कोचिंग लेने के पैसे

Sameer Verma
Sameer Verma

समीर वर्मा ने स्विस ओपन का खिताब अपने नाम कर लिया है

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मध्य प्रदेश में धार जिले के बैडमिंटन समीर वर्मा ने खेल सुविधाओं के अभाव में अपनी कड़ी मेहनत के दम पर बड़ी सफलता हालिस करते हुए स्विस ओपन में डेनमार्क के विश्व के नंबर दो खिलाड़ी जेन ओ जार्जेन्सन को हराते हुए स्विस ओपन का खिताब अपने नाम कर लिया है.

समीर वर्मा की इस उपलब्धि से उनके माता-पिता और पूरे जिले के लोग खुश हैं. लोगों का कहना है कि स्विस ओपन का खिताब जीतकर समीर ने धार जिले के साथ ही देश का भी नाम रोशन किया है .

इनके पिता सुधीर वर्मा ही इनके कोच है. सुधीर वर्मा एक सामान्य शासकीय नौकरी में हैं. उनके पास मँहगे खेल प्रशिक्षण केन्द्रों में बेटों को भेजने के पैसे नहीं थे. लिहाजा इन्होने खुद ही दोनो बेटों समीर वर्मा और सौरभ वर्मा को बचपन से ही बैडमिंटन का प्रशिक्षण देना शुरु किया और इनकी ये मेहनत रंग लाई. इनके दोनो बेटे समीर वर्मा और सौरभ वर्मा बैडमिंटन के अंर्तराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं.



अक्टूबर 2017 में समीर वर्मा को वर्ल्ड बैडमिंटन एसोसिएशन के द्वारा 18वीं रैंक दी गई, जिससे ये विश्व के 18 नंबर के बैडमिंटन खिलाड़ी बने. इसके साथ ही पीबीएल (प्रीमियर बैडमिंटन लीग) के लिये मूव मुंबई रेकेट्स ने इन्हे 52 लाख रुपये का पैकेज दिया है.
समीर वर्मा ने हाल ही में स्विस ओपन मे डेनमार्क के विश्व के नंबर दो खिलाडी जेन ओ जार्जेन्सन को 21-15 , 21-13 के सीधे सेटों मे हराते हुए स्विस ओपन 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट का मेन्स सिंगल्स का खिताब हासिल किया है.

समीर वर्मा मानते हैं कि सन 2017 और 2018 की शुरुआत का समय उनके लिये महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि इन्होने इस समय में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. अब ओलंपिक तक जाना और उसमें सफलता प्राप्त करना इनका लक्ष्य है और उसी को लेकर इन्होने तैयारी भी शुरु कर दी है.

स्विस ओपन समीर और उनके परिवार के लिये कभी ना भूल सकने वाली खुशियां लेकर आया है. समीर के पिता सुधीर वर्मा और माँ संगीता वर्मा भी समीर की इतनी बड़ी सफलता से काफी खुश हैं. इसका श्रेय वे समीर की कड़ी मेहनत को देते हुए कहते हैं कि समीर ओलंपिक तक जाए और देश के लिये पदक हासिल कर देश का और उनका नाम रोशन करे, उनका बस यही सपना है.
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