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स्कंद पुराण में है इस देवी मंदिर का वर्णन, देवराज इंद्र ने की थी घने जंगलों में इसकी स्थापना

मधयप्रदेश के विंध्यांचल पर्वत शृंखला के मालवा पठार में 3 हजार फीट ऊपर माता पार्वती का चमत्कारिक मन्दिर हैं. कहते है कि ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट- हरिकेश द्विवेदी

    महू. इंदौर से लगभग 40 किमी दूर महू मंडलेश्वर मार्ग परअष्टभुजाधारी माता पार्वती का अति प्राचीन मंदिर स्थित है. देवी का यह मंदिर मालवा एवं निमाड़ की सीमा के बीच खूबसूरत वादियों में बसा हुआ है. प्राचीन इतिहास से जुड़ा यह मंदिर अपने साथ कई रोचक तथ्यों को भी संजोए हुए है, लिहाजा दूर दराज से प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु मंदिर में माता के दर्शन करने आते है. महू विधानसभा के अंतर्गत आने वाला यह क्षेत्र होलकर राज्य की अंतिम सीमा माना जाता था. यहां बनाया गया जाम गेट इन सीमाओं को जोड़ता हैं और मालवा एवं निमाड़ का बॉर्डर बना हुआ है.

    फिलहाल जाम गेट मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की निगरानी में है. रोजाना सैकड़ों लोग जाम गेट आते है और वादियों का आनंद लेते हैं. यह पूरा क्षेत्र विंध्यांचल पर्वत श्रृंखला के मालवा का पठार हैं, यह क्षेत्र पठार शुरू होते ही काफी मनमोहक होने लगने लगता है. जंगलों के बीच से निकलने वाली पतली और टेढ़ी सड़कों से सैर करते हुए निकलना और भी खूबसूरती भरा होता है. इन्ही चेक प्वाइंट के ऊपर पहाड़ी पर माता पार्वती का मंदिर है जो लगभग 3000 फिट की उंचाई पर बना है.

    नवरात्रि के दिनों में कई धार्मिक आयोजन होते हैं…
    मंदिर में नवरात्रि के दिनों में कई धार्मिक आयोजन होते है. मंदिर के ऊपर से पहाड़ियां और घाटी बेहद खूबसूरत और रोमांचक नजर आते है. बारिश के दिनों में बहने वाले झरने इस पूरे प्राकृतिक वातावरण को और भी खूबसूरत बना देते है. स्कंद पुराण में भी इस मंदिर का वर्णन मिलता है, स्कंद पुराण के अनुसार माता के इस प्रतिमा की स्थापना देवराज इंद्र ने की थी. स्थापित प्रतिमा में माता महिषासुर का वध करती नजर आ रही है. इसीलिए माता को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है. यह प्रतिमा पत्थर से निर्मित है और करीब सवा फिट की है. मान्यता है कि माता दिन में तीन बार अपना रूप भी बदलती है. जो दिन में माता एक बच्ची का रूप ले लेती है तो वहीं दोपहर में माता की प्रतिमा जवान वयस्क दिखने लगती है साथ ही शाम होते ही प्रतिमा वृद्धावस्था में नजर आने लगती हैं.

    माता के दर्शन के लिए कई दूर राज्यों से भी श्रद्धालु दर्शन करने आते है. प्रसिद्ध सियाराम बाबा ने मंदिर प्रांगण के विकास के लिए 50 लाख से अधिक की सहायता राशि भी दी है वहीं करीब 5 सालों से मंदिर का काम अभी जारी हैं.

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