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जुड़वां बेटियों के जन्म पर अनोखा जश्न, रथ से बहू को लाए घर, VIDEO देखिए कैसे किया स्वागत

जुड़वां बेटियों के जन्म पर अनोखा जश्न, रथ से बहू को लाए घर, VIDEO देखिए कैसे किया स्वागत

Dhar News: धार जिले में जुड़वां बच्चियों का ददिहाल ने जोरदार स्वागत किया. उन्हें रथ पर बैठाकर जुलूस के साथ घर लाया गया.

Dhar News: धार जिले में जुड़वां बच्चियों का ददिहाल ने जोरदार स्वागत किया. उन्हें रथ पर बैठाकर जुलूस के साथ घर लाया गया.

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के धार जिले में जुड़वा बेटियों का स्वागत देखने लायक था. गणेश चतुर्थी के दिन पैदा हुई बच्चियों का नाम परिवार ने रिद्धि-सिद्धि रखा. बच्चियों का जन्म ननिहाल में हुआ और उन्हें 4 महीने बाद ददिहाल लाया जा रहा था. बेटियों को मां के साथ सजे हुए रथ पर लाया गया. ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला गया. दादा और पूरा परिवार रथ के आगे जोरदार नाच रहा था. परिवार का मानना है कि बेटियां अभिशाप नहीं होती. वे एक नहीं दो परिवारों को तारती हैं.

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धार. मध्य प्रदेश के धार जिले में जुड़वा बेटियों का जोरदार स्वागत हुआ. बेटियों का नाम रिद्धि और सिद्धि रखा गया है. कोणदा गांव के भायल परिवार में जन्मीं इन बेटियों को मां के साथ सजे हुए रथ में बैठाकर लाया गया. इनका ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला गया. दादा सहित पूरा परिवार रथ के आगे झूम-झूमकर कर चल रहा था. परिवार का मानना है कि बेटियां अभिशाप नहीं होती. वे एक नहीं दो परिवारों को तारती हैं.

जानकारी के मुताबिक, मयूर भायल कोणदा गांव में रहते हैं. उनकी पत्नी कुछ महीनों पहले मायके दोगांवा गांव गई थीं. उन्होंने यहां पिछले साल 11 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन दो जुड़वां बेटियों को जन्म दिया. चूंकि, उस दिन गणेश चतुर्थी तो परिजनों ने आपसी सहमति से बच्चियों का नाम रिद्धि-सिद्धि रख दिया. महिला चार महीने बाद शनिवार को बच्चियों को लेकर घर आई. इस कार्यक्रम का वीडियो वायरल हो गया है. लोग इसे सराहनीय पहल भी बता रहे हैं.

बच्चियों का जबरदस्त स्वागत

ददिहाल ने ननिहाल से बच्चियों को लाने के लिए जबदस्त इंतजाम किया. गांव के माता मंदिर से लेकर सभी जगह स्वागत का इंतजाम किया गया. ढोल-नगाड़ों के साथ-साथ डीजे का भी इंतजाम किया गया. इस दौरान जबरदस्त जुलूस निकाला गया. जुलूस इतना शानदार था कि दो किलोमीटर का रास्ता तय करने में दो घंटे लग गए. बच्चियों का स्वागत सुबह साढ़े ग्यारह बजे शुरू हुआ और शाम साढ़े चार बजे तक चला.

बेटी अभिशाप नहीं वरदान है

बच्चियों के दादा जगदीश भायल का कहना है कि बेटी अभिशाप नहीं  होती, वरदान होती है. बेटियां भविष्य हैं. बेटा तो एक तारता है, बेटियां दो घरों को तारती हैं. गांव वाले भी जगदीश की सोच की जमकर तारीफ कर रहे हैं. डेढ़ साल पहले जगदीश ने अपने बेटे की शादी भी इसी तरह धूमधाम से की थी.

Tags: Dhar news, Mp news

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