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जमीन का मुआवजा नहीं मिलने से नाराज किसानों ने चुनाव बहिष्कार का किया ऐलान

बिलगढ़ा मध्यम सिंचाई परियोजना
बिलगढ़ा मध्यम सिंचाई परियोजना

किसानों ने बताया कि बाँध और नहर निर्माण के लिये शासन द्धारा उनकी कृषि भूमि का अधिग्रहण तो कर लिया गया लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद भी उनको मुआवजे की राशि नहीं मिली है. मुआवजे की राशि पाने वो किसान सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

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डिंडौरी जिले के शहपुरा क्षेत्र में करोड़ों की लागत से बने बिलगढ़ा मध्यम सिंचाई परियोजना में भ्रष्टाचार होनेऔर मुआवजा नहीं मिलने से नाराज करीब 50 गांवों के हजारों किसानों ने चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया है. किसानों ने बताया कि बाँध और नहर निर्माण के लिये शासन ने उनकी कृषि भूमि का अधिग्रहण तो कर लिया गया लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद भी उनको मुआवजे की राशि नहीं मिली है. मुआवजे की राशि पाने वो किसान सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

किसानों का कहना है कि उनके खेतों तक सिंचाई के लिये पानी मिल सके यह सोचकर उन्होंने अपनी भूमि नहर निर्माण के लिए दी थी. लेकिन नहर का निर्माण इतना घटिया कराया गया कि पहली ही बारिश में नहर जगह जगह से फूट गई है. किसानों को न तो मुआवजे की राशि मिली और न ही उनके खेतों में सिंचाई के लिये पानी मिल पा रहा है. इसलिए किसानों ने आने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है.

इलाके के पूर्व बीजेपी विधायक चैनसिंह भवेदी खुद एक किसान हैं लेकिन उनको भी मुआवजे की राशि नहीं मिल पाई है. इस वजह से वह भी खासा नाराज नजर आ रहे हैं. मामले को लेकर पूर्व बीजेपी विधायक चुनाव के पहले अपनी ही सरकार के खिलाफ बड़ा किसान आंदोलन करने की बात कर रहे हैं.



वहीँ जलसंसाधन विभाग के अधिकारी गोलमोल जवाब देकर मामले से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं. बता दें कि डिंडौरी जिले में सिंचाई का रकबा बढ़ाने और सिंचाई के लिये किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए 269 करोड़ की लागत से बिलगढ़ा बांध परियोजना बनाई गई थी. करीब 100 गावों के हजारों किसान इस सिंचाई परियोजना का लाभ ले सकें इस उद्देश्य से सिलगी एवं सिलहटी नदी को जोड़कर बांध बनाया गया था. लेकिन अफसरों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की वजह से यह महत्वाकांक्षी परिरयोजना विवादों में आ गई है.
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