अपना शहर चुनें

States

डिंडोरीः विकास के नाम पर दोबारा बना दिए हॉस्टल, छात्रों के इंतजार में हो गए खंडहर

डिंडोरी में 2012 में बने हॉस्टल देखरेख के अभाव में खंडहर होने लगे हैं.
डिंडोरी में 2012 में बने हॉस्टल देखरेख के अभाव में खंडहर होने लगे हैं.

डिंडोरी (Dindori) में विकास के नाम पर आदिवासी छात्रों (Tribal Students) के लिए हॉस्टल (Hostel) तो बना दिए गए, लेकिन सरकारी विभागों की अनदेखी से ये छात्रों के किसी काम न आए. देखरेख के अभाव में ये हॉस्टल अब खंडहर होने लगे हैं.

  • Share this:
डिंडोरी. नक्सल प्रभावित और आदिवासी क्षेत्र के विकास के नाम पर केंद्र और राज्य सरकारें हर साल करोड़ों रुपए जारी करती है, ताकि इस इलाके के लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंच सकें. लेकिन सरकारी विभागों की अनदेखी और अफसरों की लापरवाही से सरकार की योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं. मध्य प्रदेश के डिंडोरी (Dindori) जिले में छात्रों के लिए बने हॉस्टल (Hostel), विकास कार्य के नाम पर हुई इसी अनदेखी के उदाहरण हैं. एमपी और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे डिंडोरी के पंडरीपानी, बाहरपुर और जुगदई गांव में सरकार ने करोड़ों की लागत से आदिवासी छात्रों (Tribal Students) के लिए हॉस्टल बनवाए. लेकिन एक बार भवन बन जाने के बाद न तो इनकी देखरेख की गई और न ही अफसरों ने इन हॉस्टलों में छात्रों के रहने का इंतजाम किया. नतीजा, वर्ष 2012 में बनने के बाद से अब तक इन हॉस्टलों का समुचित इस्तेमाल नहीं हुआ, और अब ये भवन खंडहर होने लगे हैं.

पहले से थे हॉस्टल, फिर भी हुआ निर्माण
डिंडोरी के जिन तीन गांवों में आदिवासी छात्रों के लिए जो हॉस्टल बनाए गए, उनके निर्माण में कई स्तर पर भ्रष्टाचार की बानगी देखने को मिलती है. केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 में आईएपी योजना (IAP Scheme) के तहत डिंडोरी के इन गांवों में हॉस्टल निर्माण के लिए राशि जारी की. पहले साल 25 तो दूसरे वर्ष इस मद में 30 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई. आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि जिन गांवों में हॉस्टल बनाने के लिए सरकार ने राशि जारी की थी, वहां पहले से ही ऐसे हॉस्टल बने हुए थे. यानी विभागीय अधिकारियों की कारस्तानी से दोबारा से ऐसे हॉस्टल निर्माण के लिए राशि जारी करा दी गई.

Dindori Hostel News-Naxal Area-Tribal Development
केंद्र सरकार ने इन भवनों के निर्माण के लिए दिए थे पैसे.

बनने के बाद नहीं ली सुध


वर्ष 2010 में राशि मिलने के बाद हॉस्टल निर्माण का कार्य शुरू हुआ और 2012 में ये भवन बनकर तैयार हो गए. लेकिन अफसोस की बात यह है कि एक बार बनने के बाद इन भवनों की किसी ने सुध तक नहीं ली. करंजिया विकास खंड के जुगदई, बाहरपुर और पंडरीपानी में बने ये हॉस्टल देखरेख के अभाव में खंडहर होते चले गए, लेकिन सरकार के किसी विभाग को इन भवनों की पिछले 7 वर्षों में फिक्र तक नहीं हुई. अब तो खंडहर हो रहे इन भवनों में लगे कीमती सामान भी गायब होने लगे हैं, फिर भी किसी अधिकारी की नींद नहीं टूट रही है.

एक-दूसरे पर फोड़ रहे ठीकरा
डिंडोरी जिले में इन भवनों के निर्माण और रख-रखाव न होने के लेकर जब न्यूज 18 के संवाददाता ने जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, तो कुछ संबंधित विभागों के कर्ता-धर्ता एक-दूसरे के ऊपर ठीकरा फोड़ते नजर आए. हॉस्टलों का निर्माण करने वाले लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन इंजीनियर एमएस धुर्वे ने कहा कि उनके विभाग की जिम्मेदारी भवन निर्माण तक सीमित थी. उन्होंने कहा कि भवन निर्माण पूरा होने के बाद ये भवन आदिवासी विकास विभाग को हैंडओवर कर दिए गए थे. वहीं, आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी से जब न्यूज 18 ने बात की, तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

ये भी पढ़ें -

ग्वालियरः बाइक सवार दंपति को रोक पुलिस बोली-'भाभी जी, भाई साहब को हेलमेट पहनाइए'

राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में नहीं होगा, तो फिर कहां होगा: मुस्लिम मंच
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज