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डिंडौरी जिले में बैगाओं को नहीं मिल रही आहार अनुदान राशि

आहार अनुदान राशि के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्‍कर काट रहीं बैगा आदिवासी महिलाएं.

आहार अनुदान राशि के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्‍कर काट रहीं बैगा आदिवासी महिलाएं.

डिंडौरी जिले के बैगा आदिवासी बहुल भीतलबहरा ग्राम के बैगा आदिवासियों को आहार अनुदान की राशि कई महीनों से नहीं मिल रही है.

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कुपोषण को जड़ से समाप्त करने के लिए मध्‍यप्रदेश सरकार तमाम योजनाएं संचालित करने का दावा तो करती है, लेकिन सरकारी अफसरों की लापरवाही के चलते जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. आलम यह है कि योजनाओं का लाभ पाने ग्रामीण सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

ताजा मामला डिंडौरी जिले के बैगा आदिवासी बहुल भीतलबहरा ग्राम का है, जहां बैगा आदिवासियों को आहार अनुदान की राशि कई महीनों से नहीं मिल रही है. कुपोषण पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ग्रामीण अंचलों में निवासरत बैगा आदिवासी परिवार की मुखिया महिला को पोषण आहार अनुदान के लिए प्रतिमाह 1000 रुपए देने की योजना चला रही है, लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण बैगा आदिवासियों को सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इस बात की शिकायत पीड़ित बैगा आदिवासियों ने अनेक बार स्थानीय स्तर से लेकर जिले के जवाबदार अधिकारियों से भी की है, लेकिन अब तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली है.

जिला पंचायत उपाध्यक्ष गंगा सिंह पट्टा ने बैगा आदिवासियों की दुर्दशा को लेकर जिला प्रशासन को आड़े हाथ लेते हुए प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा है. पट्टा का कहना है जब चुनाव का वक्त आता है, तब प्रदेश के बड़े नेता बैगा आदिवासियों के घर में जाकर खाना खाते हैं और उनके हितों की बात करते हैं और पांच साल तक दोबारा उन्हें पलटकर देखते तक नहीं हैं. प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान अपनी हर सभा में बैगा आदिवासी बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए देने की घोषणा करते हैं, बावजूद इसके डिंडौरी में दर्जनों बैगा आदिवासियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
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