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गरीब ग्रामीण को कर्ज लेकर करना पड़ा बेटे का अंतिम संस्‍कार

मीडिया को आपबीती बताते हुए सखरू सिंह.

मीडिया को आपबीती बताते हुए सखरू सिंह.

गरीब पिता को आर्थिक मदद मुहैया कराना तो दूर की बात, पंचायत के किसी भी नुमाइंदे ने पीड़ित परिवार के घर तक जाना मुनासिब नहीं समझा. लिहाजा अंतिम संस्कार के लिए पिता को लोगों से कर्ज लेना पड़ा.

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एक तरफ मध्‍यप्रदेश सरकार गरीबों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अफसरों की लापरवाही और मनमानी के कारण जरूरतमंदों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. ऐसा ही एक मामला डिंडौरी जिले के रानी बुढ़ार गांव का सामने आया है, जहां एक गरीब पिता को अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने के लिए लोगों से कर्ज लेना पड़ा.

यह भी पढ़ें : रात भर सड़क पर फंसा रहा वाहन, बांस बल्ली में बांध कर ले जाना पड़ा शव

आपको बता दें कि यह वही मजबूर पिता सखरू सिंह है, जो ग्रामीणों की मदद से बांस और बल्लियों के सहारे शव को कंधे पर रखकर बरसते पानी में करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर किसी तरह गांव पहुंचे और पोस्टमार्टम के 18 घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार किया जा सका, क्योंकि गांव तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है. ऐसे में दलदल से भरे ऊबड़-खाबड़ जंगली रास्तों को पार करके सिर्फ पैदल ही गांव तक पहुंचा जा सकता है.



हैरत की बात तो यह है कि मुख्यमंत्री अंत्येष्टि एवं संबल योजना के तहत ग्राम पंचायत द्वारा गरीब वर्ग के लोगों के अंतिम संस्कार के लिए तत्काल पांच हजार रुपए और दो लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन गरीब पिता को आर्थिक मदद मुहैया कराना तो दूर की बात, पंचायत के किसी भी नुमाइंदे ने पीड़ित परिवार के घर तक जाना मुनासिब नहीं समझा. लिहाजा अंतिम संस्कार के लिए पिता को लोगों से कर्ज लेना पड़ा.
लापरवाही उजागर होने के बाद अब अधिकारी पीड़ित परिवार के घर जाकर आर्थिक मदद देने की बात कर रहे हैं और बहुत जल्द गांव तक सड़क निर्माण कराने का भरोसा भी जता रहे हैं. पीड़ित पिता ने सरकारी योजनाओं को दिखावा बताते हुए एक बार फिर उन पुलिसकर्मियों की तारीफ की है, जिन्होंने आर्थिक मदद कर शव वाहन मुहैया कराया था.
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