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VIDEO: स्‍कूल जाने के लिए बच्‍चे रोज चप्‍पलें हाथ में लेकर कीचड़ में चलते हैं 14 किमी

इस गांव के 50 से ज्यादा बच्‍चे गांव से 7 किलोमीटर दूर स्कूल जाते हैं. इन छात्रों को रोज दलदल को पार कर स्कूल जाने और आने में प्रतिदिन करीब 14 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है.

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मध्‍यप्रदेश में डिंडौरी जिले के मूसामुंडी ग्राम पंचायत में सड़क की हालत इतनी खस्ता है कि ग्रामीणों को सात किलोमीटर का लंबा सफर पैदल ही तय करना पड़ता है. कीचड़ से सराबोर इस कच्चे रास्‍ते पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि गांव तक वाहनों का पहुंचना असंभव है. सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना यहां स्कूली छात्रों को करना पड़ता है. वे जूते-चप्पल हाथ में लिए दलदल को पारकर कई मुसीबतों के बाद स्कूल पहुंच पाते हैं. सड़क बनाए जाने की मांग पूरी न होने से नाराज ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्‍कार का निर्णय ले लिया है.

ग्रामीणों ने बताया कि अगर उनके गांव में कोई बीमार हो जाए या गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होती है, तो उन्हें खटिया के सहारे पैदल चलकर अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है. इस गांव के 50 से ज्यादा बच्‍चे गांव से 7 किलोमीटर दूर स्कूल जाते हैं. इन छात्रों को रोज दलदल को पार कर स्कूल जाने और आने में प्रतिदिन करीब 14 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. इस दौरान वे अपने जूते-चप्‍पल हाथ में लेकर चलते हैं. छात्रों ने बताया कि कई बार वे कीचड़ में गिर जाते हैं, जिससे उनकी ड्रेस और किताबें ख़राब हो जाते हैं.

ग्रामीणों ने बताया कि वे बदहाल सड़क को दुरुस्त कराए जाने की मांग करते-करते थक गए हैं. अब उन्होंने चुनाव बहिष्कार करने का निर्णय ले लिया है. ग्रामीणों ने 'रोड नहीं तो वोट नहीं' का एक शिकायती पत्र जिला प्रशासन को सौंप दिया है. साथ ही ग्रामीणों ने अपने घरों की दीवारों पर भी रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा लिखकर आंदोलन करने का मन बना लिया है. वहीं जवाबदार विभाग के अधिकारी सड़क की बदहाली की बात तो स्वीकारते हैं, लेकिन गोलमोल जवाब देकर अपनी जवाबदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आते हैं.
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