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हॉस्टल में बाहर से ताला लगाकर सो गया अधीक्षक, रात भर तड़पने के बाद स्टूडेंट की मौत

डॉक्टर की मानें तो छात्र को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था. यदि समय रहते छात्र का इलाज कराया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी.

डॉक्टर की मानें तो छात्र को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था. यदि समय रहते छात्र का इलाज कराया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी.

डॉक्टर की मानें तो छात्र को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था. यदि समय रहते छात्र का इलाज कराया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी.

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मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के मेहंदवानी बालक छात्रावास में इलाज के अभाव में एक छात्र की मौत का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि है कि अधीक्षक खुशीराम उइके छात्रावास में बाहर से ताला लगाकर अपने घर में सो रहा था. रात में कक्षा दूसरी के छात्र महेंद्र की अचानक तबीयत बिगड़ गई. छात्र पूरी रात इलाज के लिये तड़पता रहा और सुबह जब छात्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया तब उसने दम तोड़ दिया.

डॉक्टर की मानें तो छात्र को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था. यदि समय रहते छात्र का इलाज कराया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी. वहीं घटना के बाद छात्रावास अधीक्षक गोलमोल जवाब देकर अपनी जवाबदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं.

छात्रावास प्रबंधन की लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है. आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले के छात्रावासों में आये दिन लापरवाही के मामले सामने आते रहते हैं. छात्रावास में छात्रों को पढ़ाने के नाम पर उनके जान से खिलवाड़ किया जा रहा है.



हाल में ही बोंदर बालक छात्रावास में सीनियर छात्रों की प्रताड़ना से तंग आकर सातवीं कक्षा के छात्र ने जहर खाकर खुदकुशी का प्रयास किया था. पीड़ित छात्र ने इस बात की शिकायत छात्रावास अधीक्षक से भी की थी, लेकिन प्रबंधन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं होने के कारण छात्र को आत्महत्या करने जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
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