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मंत्री के गृह जिले में परीक्षा फीस के नाम पर आदिवासी छात्रों से वसूले 1500 रुपए

डिंडोरी में आदिवासी छात्रों ने बीपीएल और आय प्रमाणपत्र कार्ड भी दिखाए, फिर भी नहीं मिली छूट.
डिंडोरी में आदिवासी छात्रों ने बीपीएल और आय प्रमाणपत्र कार्ड भी दिखाए, फिर भी नहीं मिली छूट.

आदिम जाति कल्याण मंत्री ओमकार मरकाम (Omkar Markam) के गृह जिले डिंडोरी (Dindori) में एससी/एसटी वर्ग के छात्रों से फीस नहीं लेने के आदेश के बावजूद सरकारी स्कूल (Government School) ने आदिवासी छात्रों (Tribal students) से लिए 1500 रुपए. में सरकारी निर्देश की उड़ी धज्जियां. मामला सामने आने के बाद कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश.

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डिंडोरी. मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) एक तरफ तो आदिवासियों की शिक्षा और विकास के लिए विभिन्न योजनाएं लागू करने का ढिंढोरा पीटती है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा संचालित स्कूलों (Government School) में आदिवासी छात्रों से अवैध रूप से फीस वसूल किए जा रहे हैं. मामला डिंडोरी (Dindori) जिले का है, जहां से प्रदेश के आदिम जाति कल्याण मंत्री ओमकार मरकाम (Omkar Markam) का ताल्लुक है. मंत्री के गृह जिले में गरीब आदिवासी छात्रों से परीक्षा फ़ीस के नाम पर लाखों रुपए वसूलने का मामला सामने आया है. जिले के सरकारी स्कूलों में प्रबंधन के द्धारा 10वीं और 12वीं कक्षा के गरीब आदिवासी छात्रों से पंद्रह-पंद्रह सौ रुपए वसूले गए. सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग (SC/ST Students) के छात्रों से परीक्षा फीस नहीं लेने का प्रावधान बना रखा है. बावजूद इसके डिंडोरी जिले के स्कूल में अवैध रूप से परीक्षा फीस वसूली गई. इतना ही नहीं, 1500 रुपए लेने के बाद इन छात्र-छात्राओं को सिर्फ 360 रुपए की रसीद थमा दी गई.

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
शासन की गाइडलाइन के मुताबिक अनुसूचित जाति एवं जनजाति के ऐसे छात्र जिनका नाम गरीबी रेखा में शामिल है या ऐसे छात्र जिनके माता-पिता की वार्षिक आय एक लाख रुपए से कम है, उनसे परीक्षा फ़ीस नहीं लेने का बाकायदा आदेश जारी किया गया है. लेकिन आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले में अफसर और स्कूल के कर्ताधर्ताओं ने शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए गरीब आदिवासी छात्रों से परीक्षा फ़ीस के नाम पर लाखों रुपए ऐंठ लिए. फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद जिले के कलेक्टर बी कार्तिकेयन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

1500 रुपए लेकर सिर्फ 360 रुपए की फीस थमा दी गई.

BPL कार्ड देने पर भी छूट नहीं


न्यूज 18 की पड़ताल में पता चला कि हायर सेकेंडरी स्कूल रूसा में 10वीं और 12वीं मिलाकर 243 अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्र अध्यनरत हैं. 12वीं के छात्र उमेश ने बताया कि परीक्षा फ़ीस के नाम पर उससे 1500 रुपए लिए गए, लेकिन रसीद सिर्फ 360 रुपए की ही दी गई. किसान पिता के बेटे उमेश ने कहा कि परीक्षा फॉर्म के साथ गरीबी रेखा कार्ड एवं आय प्रमाण पत्र देने पर भी फीस ली गई. इसी तरह गोपालपुर हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं की छात्रा चित्रलेखा ने भी बताया कि स्कूल प्रबंधन ने एडमिशन फ़ीस के नाम पर पहले 700 और फिर परीक्षा फीस के नाम पर 1000 रुपए लिए. इसकी कोई रसीद भी नहीं दी गई. चित्रलेखा ने बताया कि उसके पिता सुदामा किसान हैं, जिनकी वार्षिक आय 40 हजार रुपए है. सुदामा सिंह ने बताया कि उन्होंने आय प्रमाण पत्र के साथ सभी दस्तावेज जमा किए, लेकिन छूट नहीं मिली. अवैध फीस वसूली का खेल रूसा और गोपालपुर के अलावा उमरिया हायर सेकेंडरी स्कूल में भी खेला गया. इस स्कूल के छात्रों एवं अभिभावकों ने बताया कि यहां भी छात्रों से परीक्षा फीस के नाम पर पंद्रह-पंद्रह सौ रुपए वसूले गए, लेकिन रसीद नहीं दी गई है.

प्रिंसिपल ने स्टाफ पर फोड़ा ठीकरा
न्यूज 18 ने जब छात्रों की शिकायत पर रूसा हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य चिंताराम कुशराम से बात की, तो पहले उन्होंने मामले से खुद को अंजान बताया. लेकिन कई प्रमाण दिखाने के बाद प्रिंसिपल ने खुद को पाक साफ करते हुए स्कूल के कर्मचारियों पर गलती का ठीकरा फोड़ दिया. वहीं, गोपालपुर और उमरिया के प्राचार्य ने संवाददाता से बात करने से ही इनकार कर दिया. इधर, मामले की जानकारी जब डिंडोरी कलेक्टर बी कार्तिकेयन को हुई तो उन्होंने जांच के बाद उचित कार्रवाई की बात कही. कलेक्टर ने कहा कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

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