धीमी गति के चलते अधर में पशुओं का 'आधार', डेढ़ साल में बना सिर्फ 200 गौवंश का डाटा
Agar-Malwa News in Hindi

धीमी गति के चलते अधर में पशुओं का 'आधार', डेढ़ साल में बना सिर्फ 200 गौवंश का डाटा
गौवंश के कान में इस तरह लगाया जाता है टैग.

केंद्र सरकार गायों की तस्करी और चोरी रोकने के लिए उनका आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है. हालांकि मध्यप्रदेश में कछुआ चाल से हो रहे काम के चलते गौवंश का आधार अधर में लटका हुआ है.

  • Share this:
केंद्र सरकार गायों की तस्करी और चोरी रोकने के लिए उनका आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है. हालांकि मध्यप्रदेश में कछुआ चाल से हो रहे काम के चलते गौवंश का आधार अधर में लटका हुआ है. प्रदेश में डेढ़ साल पहले शुरू की गई योजना में आगर मालवा जिले में अब तक केवल 200 गौवंश का ही आधार कार्ड बना है.

नवम्बर 2013 में केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय के पशुपालन विभाग ने राज्य सरकार को आदेशित किया कि गौ वंश का आधार डाटा तैयार किया जाए. बारह डिजिट का यह आइडेंटिफिकेशन नंबर गौ वंश के कान में पीले रंग के एक प्लास्टिक बैज पर रहेगा. जिसमें गाय के मालिक का नाम पता के साथ गाय की शारीरिक स्थिति और दूध देने की क्षमता के अलावा गर्भाधान का पूरा ब्यौरा रहेगा. प्रदेश में योजना पर अमल फरवरी 2016 में तब शुरू हुआ जब चार जिलों खरगोन, धार, शाजापुर और आगर मालवा को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया.

गौवंश के आधार पंजीयन और टैग लगाने के लिए पशु चिकित्सकों को भोपाल में विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया. लेकिन आगर मालवा जिले में पशु गणना 2012 के आंकड़े के मुताबिक एक लाख सत्तावन हजार गौवंश मौजूद हैं, लेकिन डेढ़ साल की मशक्कत के बाद महज 200 गौवंश का ही आधार डाटा तैयार हो सका है.



बता दें कि मध्य प्रदेश में लगभग 90 लाख दुधारू पशु हैं, जिनमें से करीब 54 लाख गायें हैं. फिलहाल 1200 के करीब गायों को यूआईडी लगा है. योजना हर महीने साढ़े सात लाख दुधारू पशुओं पर यूआईडी लगाने की थी, जिसके लिए 3600 कर्मचारी काम कर रहे हैं. जबकि देश भर में साल 2016-17 में करीब पचास लाख, 2017-18 में करीब 3 करोड़ और शेष बाकी बचे दुधारू पशुओं को 2019-2020 विशेष टैग देने की योजना थी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading