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जबलपुरः बेटी की शादी का सपना पूरा न हो सका तो अब संवार रहे इनकी जिंदगी
Jabalpur News in Hindi

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: April 7, 2020, 5:15 PM IST
जबलपुरः बेटी की शादी का सपना पूरा न हो सका तो अब संवार रहे इनकी जिंदगी
इन दिनों मिश्रा दंपति के पास एक ही काम है. रुपयों के लिफाफे बनाना और जरूरत मंदों तक इन रुपयों को पहुंचाना.

द्वारका मिश्र (Dwarka Mishra) ने अपनी पत्‍नी से कहा- मंजुला क्‍यों न हम शौर्या (Shaurya) के दहेज के रुपयों को गरीबों (Poor) की मदद में इस्‍तेमाल करें और मंजुला इसके लिए सहर्ष तैयार हो गईं.

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जबलपुर. मदन महल (Madan Mahal) इलाके में रहने वाले द्वारका मिश्रा (Dwarka Mishra) की जिंदगी में दो ही सपने थे. पहला सपना बेटी शौर्या (Shaurya) को डॉक्‍टर बनाना था और दूसरा उसकी धूमधाम से शादी करनी थी. सालों की मेहनत के बाद द्वारका मिश्रा ने अब इतनी रकम इकट्ठा कर ली थी कि वे अपने दोनों सपनों को आसानी से पूरा कर सकते थे. बेटी शौर्या उम्र की 22वीं दहलीज पर कदम रख चुकी थी. बायोटेक से ग्रेजुएशन करने के बाद अब शौर्या का अगला कदम मेडिकल (Medical) की पढ़ाई की तरफ था.

द्वारका मिश्रा को बहुत जल्‍द अपना पहला सपना पूरा होता हुआ दिखने लगा था. बारी थी दूसरे सपने की. वे इसकी तरफ कदम बढ़ाते कि इससे पहले ही कुदरत ने अपनी चाल चल दी. एक दिन शौर्या की अचानक तबीयत खराब हुई और डॉक्‍टरों ने कह दिया- वह अब कुछ ही दिन की मेहमान है. यह सुनते ही द्वारका मिश्र के पैरों तले की जमीन खिसक गई. द्वारका मिश्र अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद अपनी बेटी को बचाने में नाकामयाब रहे. दो महीने पहले शौर्या सभी को छोड़ कर इस दुनिया से रुखसत हो गई.

ये बात लगी दिल को
बेटी के निधन के बाद द्वारका मिश्र टूट गए. अब न तो उनका दिल अपने कारोबार में लगता था और न ही दीन-दुनिया में. जब भी बेटी के लिए इकट्ठा किए रुपयों और गहनों की तरफ देखते, उनका दिल बैठने लगता. देखते-देखते दो महीने का वक्‍त गुजर गया और पूरा देश कोरोना वायरस के कहर से जूझने लगा. कुछ दिनों पहले की ही बात है जब द्वारका मिश्र से उनकी पत्‍नी मंजुला खाना खाने की जिद कर रही थीं, लेकिन वह बार-बार इंकार कर रहे थे. इसी बीच घर के एक सदस्‍य ने टोका, 'तुम्‍हारे पास खाना है, तो तुम खाने को इंकार कर रहे हो. उनसे पूछो, जिन्‍हें इस वक्‍त दो जून की रोटी भी नसीब नहीं रही थी.'



द्वारका मिश्र की दिवंगत बेटी शौर्या. Shaurya, late daughter of Dwarka Mishra.
द्वारका मिश्र की दिवंगत बेटी शौर्या.




यह वाक्‍य द्वारका मिश्र की तंद्रा को तोड़ने वाला था. इसी वक्‍त उनके दिल में ख्‍याल आया कि क्‍यों न शौर्या की पढ़ाई और शादी के लिए इकट्ठा रुपयों का इस्‍तेमाल इन गरीबों का पेट भरने के लिए किया जाए. मन में विचार आया तो पत्नी के साथ साझा किया. उन्‍होंने अपनी पत्‍नी मंजुला से कहा- क्‍यों न हम शौर्या के रुपयों को गरीबों की मदद में इस्‍तेमाल करें. मंजुला इसके लिए सहर्ष तैयार हो गईं. फिर क्‍या था, द्वारका मिश्र ने शौर्या के नाम से इकट्ठा रुपए निकाले और उन्हें लिफाफों में डालना शुरू कर दिया.

कर रहे हैं लिफाफा दान
इन दिनों इस दंपति के पास एक ही काम है. रुपयों के लिए लिफाफे बनाना और जरूरतमंद लोगों तक इन्हें पहुंचाना. जब रुपए देने को लेकर द्वारका मिश्रा से पूछा गया कि आप रुपए के बजाये खाने-पीने का सामान भी तो दे सकते हैं? इस पर उनका कहना था कि हम अपनी सोच के मुताबिक लोगों को दान कर रहे हैं. इसमें कई बार ऐसा होता है कि लोगों के पास कुछ सामान तो बहुतायात में आ जाता है, लेकिन कई अन्य वास्‍तविक जरूरत पूरी नहीं हो पाती है. इसीलिए मिश्रा दंपति ने फैसला किया है कि वे लोगों को सामान नहीं, बल्कि रुपए ही देंगे, ताकि लोग अपनी जरूरत के हिसाब से पैसे खर्च कर सकें.यह भी पढ़ें:

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First published: April 7, 2020, 4:07 PM IST
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