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शेर देखना छोड़ शादी में बाराती बन गए विदेशी मेहमान

शेर देखना छोड़ शादी में बाराती बन गए विदेशी मेहमान

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत इस बार दुल्हनें तो प्रदेश की ही थी, लेकिन बाराती विदेशी रहे। प्रदेश के बालाघाट में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह समारोह में विदेशी मेहमान भी शामिल हुए। समारोह में खास बात यह थी कि प्रदेश में पहली बार इन आदिवासी जोङो का पारंपरिक गोङी रीति रिवाज से विवाह कराया गया। जब यह बात कान्हा नेशनल पार्क घूमने के लिए आए विदेशी पर्यटकों को पता चली तो वह भी टायगर सफारी को छोड़ इस अनूठे विवाह समारोह में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत इस बार दुल्हनें तो प्रदेश की ही थी, लेकिन बाराती विदेशी रहे। प्रदेश के बालाघाट में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह समारोह में विदेशी मेहमान भी शामिल हुए। समारोह में खास बात यह थी कि प्रदेश में पहली बार इन आदिवासी जोङो का पारंपरिक गोङी रीति रिवाज से विवाह कराया गया। जब यह बात कान्हा नेशनल पार्क घूमने के लिए आए विदेशी पर्यटकों को पता चली तो वह भी टायगर सफारी को छोड़ इस अनूठे विवाह समारोह में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत इस बार दुल्हनें तो प्रदेश की ही थी, लेकिन बाराती विदेशी रहे। प्रदेश के बालाघाट में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह समारोह में विदेशी मेहमान भी शामिल हुए। समारोह में खास बात यह थी कि प्रदेश में पहली बार इन आदिवासी जोङो का पारंपरिक गोङी रीति रिवाज से विवाह कराया गया। जब यह बात कान्हा नेशनल पार्क घूमने के लिए आए विदेशी पर्यटकों को पता चली तो वह भी टायगर सफारी को छोड़ इस अनूठे विवाह समारोह में शामिल हुए।

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    मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत इस बार दुल्हनें तो प्रदेश की ही थी, लेकिन बाराती विदेशी रहे। प्रदेश के बालाघाट में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह समारोह में विदेशी मेहमान भी शामिल हुए। समारोह में खास बात यह थी कि प्रदेश में पहली बार इन आदिवासी जोङो का पारंपरिक गोङी रीति रिवाज से विवाह कराया गया। जब यह बात कान्हा नेशनल पार्क घूमने के लिए आए विदेशी पर्यटकों को पता चली तो वह भी टायगर सफारी को छोड़ इस अनूठे विवाह समारोह में शामिल हुए।

    बालाघाट में आदिवासी अंचल बैहर में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत ग्राम आमगांव में जनपद पंचायत द्वारा लगभग 200 जोङों का सामूहिक विवाह कराया गया जिसमें 160 जोङे अति पिछङी आदिवासी गोंड जाति के थे। इस विवाह समारोह की अनूठी बात यह रही कि इंग्लैंड से आए विदेशी पर्यटक भी इसमें शामिल हुए। यह पर्यटक कान्हा टूर पर आए थे। उन्हें जब इस बात की जानकारी लगी कि पारंपरिक तरीके से विवाह समारोह हो रहा है तो वह सफारी छोड़ यहां पहुंच गए। बाराती बनकर इस समारोह का हिस्सा बने विदेशी पर्यटकों ने शादी की तमाम परंपराओं को अपने कैमरे में भी कैद किया।

    इस शादी में इन जोङो को पारंरिक तरीके से वस्त्राभूषण के साथ सजाया गया। उसके बाद उन सभी जोड़ों का एक साथ बैंड बाजा के साथ बारात निकालकर गोंडी रीति रिवाज से उनकी शादी कराई गई।

    जनपद पंचायत बैहर के सीईओ का कहना है कि प्रदेश में सामूहिक विवाह समारोह हर जिले में हो रहा है लेकिन गोंड आदिवासी जाति के पारंपरिक तरीके से पहली बार शादी कराने का उद्देश्य उनकी सामप्त हो रही परंपरा को जीवित करना है।

    प्रदेश में हर जिले में सामूहिक विवाह में शामिल होने वाले जोङो को देखा जाता था कि शादी करने के बाद फिर से दोबारा अपनी परंपरा के मुताबिक शादी करते है। जिससे उनका खर्चा दोबारा होता था। इसलिए इस बार सामूहिक विवाह में ही उनकी परंपरा के अनुसार ही शादी कराया गई और इन आदिवासी बैगा जनजाति की समाप्त हो रही परंपरा को दोबारा जीवित करने के लिए अनूठा सामूहिक विवाह को संपन्न कराया गया।

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