धर्मांतरण की दुकान पर 10 साल बाद लगा प्रशासन का ताला

Vikas Dixit | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: September 17, 2017, 7:05 PM IST
धर्मांतरण की दुकान पर 10 साल बाद लगा प्रशासन का ताला
आदिवासियों के लिए आरक्षित सरकारी पट्टे की ज़मीन को घेरकर उसपर पक्के भवन का निर्माण कर दिया गया, फिर वहाँ से विशेष प्रार्थना के नाम पर धर्मांतरण का कार्य संचालित किया जाने लगा.
Vikas Dixit | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: September 17, 2017, 7:05 PM IST
धर्मांतरण के मामले में भले ही प्रदेश सरकार कितनी भी गंभीर हो लेकिन सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी धर्मांतरण जारी है. मध्य प्रदेश के गुना जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बमोरी के कई गाँव ऐसे हैं जहां भोले भाले वनवासियों का धर्मांतरण करवाया जाता है.

सर्वाधिक धर्मांतरण वाले क्षेत्रों पर यदि नज़र डालें तो मोहनपुर, खेरीखता, उरईखता, दिरौली, बगोनिया, महोदरा, बिलौदा समेत करीब ऐसे दर्जन भर गाँव हैं जहां धर्मांतरण के बाद 200 से 400 परिवार प्रभावित हुए हैं.

पहले तो समाज विशेष (ईसाई समुदाय) द्वारा आदिवासियों के लिए आरक्षित सरकारी पट्टे की ज़मीन को घेरकर उसपर पक्के भवन का निर्माण कर दिया गया, फिर वहाँ से विशेष प्रार्थना के नाम पर धर्मांतरण का कार्य संचालित किया जाने लगा.

लेकिन जब बात बढ़ने लगी तो धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू किया, कई आदिवासी भी धर्मांतरण के खिलाफ खड़े हुए, जिसके चलते एक लम्बी लड़ाई के बाद बीते रोज़ प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए न केवल इस संस्थान को सील कर दिया बल्कि मोहनपुर गाँव में स्थित 2 गिरिजाघरों पर भी तालाबंदी करवा दी.

News18 की टीम ने जब गाँव पहुंचकर ज़मीनी हकीकत का जायज़ा लिया तो हैरानी हुई कि धर्मांतरण के लिए आदिवासी समुदाय के लोगों को किस कदर बहलाया फुसलाया जाता है.
धर्मांतरण में अंधविश्वास बड़ा खेल है जिसकी शिकार, हिन्दू धर्म से ईसाई धर्म अपना चुकी आदिवासी महिला इरु बाई ने बताया की कुछ समय पहले उसकी बेटी बहुत बीमार पड़ गई थी, लेकिन धर्मांतरण के बाद बाद उसकी बेटी की तबियत में सुधार हो गया . वहीँ धर्मांतरित हुए कुछ अन्य लोगों ने बताया की ईसाई धर्म अपनाने से बंद पड़े वाहन भी चालू हो जाते हैं.

कुछ इस तरह की बातों से वनवासियों को बहलाकर बड़े स्तर पर धर्मांतरण का कार्य बदस्तूर जारी है, जिसके खिलाफ प्रशासन ने एक सख्त कदम उठाते हुए संस्था पर तालाबंदी कर दी है. हालांकि तालाबंदी करने में सिस्टम को 10 साल लग गए.

ईसाई संस्था के कर्मचारी ने बताया की प्रशासन की सख्ती के चलते संस्था को बंद कर दिया गया है, कई ग्रामीण भी धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाली संस्था पर तालाबंदी से खुश नज़र आये.
धर्मांतरण के खिलाफ लम्बी लड़ाई लड़ चुके धर्म जाग्रति संगठन के लोगों ने बताया कि प्रशासन की इस पहल से धर्मांतरण पर कुछ हद तक जरूर रोक लगेगी.
First published: September 17, 2017
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