Article 370 पर उलेमा बोर्ड पीएम मोदी के साथ, PoK को भारत में मिलाने के लिए मांगी 3 दिन की छूट

Vikas Dixit | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 19, 2019, 7:51 PM IST
Article 370 पर उलेमा बोर्ड पीएम मोदी के साथ, PoK को भारत में मिलाने के लिए मांगी 3 दिन की छूट
नूरुल्लाह युसूफ जई, उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश ऑल इण्डिया उलेमा बोर्ड

जम्मू-कश्मीर से Article 370 समाप्त करने के मुद्दे पर उलेमा बोर्ड पीएम नरेंद्र मोदी के साथ है. उलेमा बोर्ड ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत में शामिल करने के लिए 3 दिन की छूट मांगी है.

  • Share this:
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 यानी Article 370 और Article 35A हटाने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुस्लिम संगठनों का भी साथ मिलने लगा है. ऑल इण्डिया उलेमा बोर्ड ने पीएम मोदी के इस कदम को ऐतिहासिक करार दिया है. खासकर ऐसे समय में जब जम्मू-कश्मीर मुद्दे ( kashmir Issue) को लेकर विपक्षी दल बंटे हुए हैं और वे केंद्र सरकार के इस कदम की आलोचना करने से परहेज नहीं कर रहे हैं. ऑल इण्डिया उलेमा बोर्ड (All India Ulema Board ) ने एक बयान में कहा है कि पकिस्तान और चीन की फितरत एक समान है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर जो कदम उठाए हैं वे देशहित में हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बैठक को संबोधित करते हुए


उलेमा बोर्ड के उपाध्यक्ष नूर उल्लाह युसूफ जई ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा कि यदि उन्हें (मुस्लिमों को ) 3 दिन का वक्त दे दिया जाए तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को भी अपने हिस्से में जोड़ लिया जाएगा. पाक अधिकृत कश्मीर पर कब्जा करते हुए उसे भारत में जोड़ने का काम मुस्लिम समाज के लोगों के स्तर से ही किया जाएगा.

आर्टिकल 370 के तहत कश्मीर के लिए था विशेष प्रावधान

कश्मीर के 1948 में भारत में विलय के बाद से आर्टिकल 370 इस राज्य में लागू था, जो इस राज्य को स्वायत्तता का दर्जा देता था और इसके लिए विशेष प्रावधान था. इसे हटाने की मांग कई दशकों से उठती रही थी.  दरअसल संविधान में आर्टिकल 370 के संशोधन की स्थिति पर साफ साफ कुछ नहीं कहा गया था. लिहाजा केंद्र सरकार ने इसी का लाभ उठाते हुए ये कदम उठाया है.

क्या है अनुच्छेद 35A?
-अनुच्छेद 35A से जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए स्थायी नागरिकता के नियम और नागरिकों के अधिकार तय होते हैं.
Loading...

-14 मई 1954 के पहले जो कश्मीर में बस गए थे वही स्थायी निवासी.

- स्थायी निवासियों को ही राज्य में जमीन खरीदने, सरकारी रोजगार हासिल करने और सरकारी योजनाओं में लाभ के लिए अधिकार मिले हैं.

-किसी दूसरे राज्य का निवासी जम्मू-कश्मीर में जाकर स्थायी निवासी के तौर पर न जमीन खरीद सकता है, ना राज्य सरकार उन्हें नौकरी दे सकती है.

-अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उसके अधिकार छिन जाते हैं, हालांकि पुरुषों के मामले में ये नियम अलग है.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए गुना से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 19, 2019, 3:38 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...