Loksabha Elections Results: कौन हैं केपी यादव जिन्होंने सिंधिया के किले को किया ध्वस्त
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Loksabha Elections Results: कौन हैं केपी यादव जिन्होंने सिंधिया के किले को किया ध्वस्त
के पी यादव (Photo- Fb)

Loksabha Elections Results: केपी यादव एक समय में सिंधिया के सबसे खास माने जाते थे. वे सिंधिया के इतने खास बन गए कि वे उनके सांसद प्रतिनिधि भी बने

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लोकसभा चुनाव 2019 में नरेंद्र मोदी के नाम की सुनामी देश के कोने-कोने तक पहुंच चुकी है. इसी कड़ी में सिंधिया राजघराने का किला कही जानी वाली गुना सीट पर बीजेपी ने परचम लहरा दिया है. राहुल गांधी के खास ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी प्रत्याशी केपी यादव ने हरा दिया है. दिलचस्प बात यह है कि केपी यादव एक समय में सिंधिया के सबसे खास माने जाते थे.

गुना लोकसभा सीट पर तीन पीढ़ियों से सिंधिया घराने का कब्जा रहा है. ग्वालियर के बाद गुना ही वह लोकसभा सीट है, जहां से सिंधिया परिवार चुनाव लड़ना पसंद करता है. इस सीट से सांसद ज्योतिरादित्य की दादी राजमाता विजयराजे सिंधिया और पिता माधवराव सिंधिया ने निर्दलीय चुनाव जीतकर इतिहास रचा था.

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अपने अजेय गढ़ से सिंधिया परिवार को हार का सामना करना पड़ रहा है. के पी यादव, जो कभी खुद सिंधिया के बेहद खास रहे, उन्होंने ही सिंधिया को हराया है. यह मुकाबला कई मायनों में दिलचस्प था. केपी यादव काफी खुश नजर आ रहे हैं, उन्होंने कहा कि ये चुनाव जनता लड़ रही है और मकसद नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाना है.
कौन हैं केपी यादव
केपी यादव पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं. उनके पिता रघुवीर सिंह यादव अविभाजित गुना जिला के चार बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहे. केपी यादव 2004 से राजनीति में सक्रिय हुए थे. तब वे जिला पंचायत सदस्य बने थे. धीरे-धीरे वे सिंधिया के इतने खास बन गए कि वे उनके सांसद प्रतिनिधि भी बने. इसके बाद वे पिछले साल विधानसभा उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज हो गए थे और बीजेपी में शामिल हो गए थे.

केपी यादव कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के नजदीकी रहे हैं. सिंधिया की चुनाव की तैयारियों को वह अच्छी तरह देखते थे. कहा जाता है कि मुंगावली विधानसभा के उपचुनाव में केपी यादव टिकट के मुख्य दावेदार थे.  सिंधिया ने इनसे तैयारी के लिए भी कह दिया था और वे क्षेत्र में सक्र‍िय भी हो गए थे. लेकिन ऐन मौके पर उनका टिकट काट दिया गया. इसके बाद ही वे कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे. मुंगावली में उनका मुकाबला कांग्रेस के बृजेंद्र प्रताप से हुआ और वे महज दो हजार वोटों से हारे थे.

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