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धूप-धूल में वोट मांगती महारानी, क्या अपनी चुनावी जमीन तैयार कर रही हैं ?

Shifalee Pandey | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 4, 2019, 11:30 AM IST
धूप-धूल में वोट मांगती महारानी, क्या अपनी चुनावी जमीन तैयार कर रही हैं ?
फाइल फोटो

कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज्यादा सभाएं उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया कर रही हैं. जबकि इस बार ज्योतिरादित्य पश्चिम यूपी की कमान संभाले हुए हैं.

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लोकसभा चुनाव 2019 में गुना-शिवपुरी संसदीय सीट की तस्वीर कुछ-कुछ बदली नजर आ रही है. यहां कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज्यादा सभाएं उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया कर रही हैं. जबकि इस बार ज्योतिरादित्य पश्चिम यूपी की कमान संभाले हुए हैं. गुना-शिवपुरी का ये इलाका सिंधिया राजघराने के प्रभाव वाला माना जाता है. लिहाजा प्रियदर्शिनी को आज भी यहां की जनता महारानी का संबोधन देती है. नुक्कड़ सभा में सिर्फ महारानी के लिए इकलौती कुर्सी लगाई जाती है. लाल कालीन की कमी पूरी करने की कोशिश में लोग गांव का सबसे साफ और नया कपड़ा कुर्सी पर बिछाते हैं. लेकिन प्रियदर्शिनी कुर्सी का रुख भी नहीं करतीं. वो जनता के बीच रहना चाहती हैं. उनके लिए लाई गई सुनहरी मालाएं, वो गांव की बेटियों को पहना देती हैं. माईक थामती हैं, तो वोट की अपील का अंदाज भी खालिस नेताओं जैसा नहीं होता.

कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए वोट मांगते हुए वो कहती हैं, ‘महाराज अकेले 17 साल से आपकी लड़ाई लड़ रहे हैं. अब आप उनके साथ खड़े हो जाइए. चौपाल और नुक्कड़ सभाओं के लिए प्रियदर्शनी उन गांवों को चुनती हैं. जहां आमतौर पर नेता या सियासी दल नहीं पहुंचते. चाहे फिर उन्हें इसके लिए सूख चुकी नदी पार क्यों न करना पड़े. नुक्कड़ सभा के मंच पर माधव राव सिंधिया की तस्वीर भी रखी जाती है. जो तस्दीक होती है कि गुना शिवपुरी से लेकर ग्वालियर चंबल के पूरे इलाके में कांग्रेस की ये जमीन सिंधिया परिवार की गहरी जड़ों की बदौलत हैं. सभाओं के बीच प्रियदर्शिनी का काफिला हाइवे के किनारे किसी खेत में दोपहर खाने के लिए रुकता है. इस समय लोकतंत्र की वो बेमिसाल तस्वीर बनती है. राजघराने की बहू, इस इलाके की जनता की महारानी खेत में दरी डालकर आम ग्रामीण महिलाओं की तरह बैठ जाती है.

प्रियदर्शिनी राजे में गुना का आम वोटर राजमाता विजयाराजे सिंधिया की छवि भी देखता है. हिंदी में धाराप्रवाह तो नहीं बोल पाती प्रियदर्शिनी लेकिन जितनी हिंदी बोलती हैं उससे वोटर कनेक्ट हो जाता है. पानी की किल्लत से लेकर राशनकार्ड की मुश्किल और विधवा पेंशन तक आम वोटर की हर एक परेशानी वो सुनती हैं. तब तक काफिला आगे नहीं बढातीं जब तक वोटर को पूरी तसल्ली ना हो जाए. इस दौरान गांव में महारानी के साथ सेल्फियां भी होती हैं.

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यूं तो पिछले कई चुनाव में प्रियदर्शिनी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के चुनाव में प्रचार के लिए गुना शिवपुरी को नापा है. लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिम यूपी की कमान दिए जाने के बाद इस बार प्रियदर्शिनी राजे ने पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है. ये और बात की 2014 की मोदी लहर में भी यहां की जनतका कांग्रेस के हाथ के साथ खड़ी रही. गुना शिवपुरी सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया जीत-हार के लिए नहीं बल्कि जीत के अंतर को बढ़ाने के लिए चुनाव लड़ते हैं. इस बार भी गुना-शिवपुरी में मिसेज सिंधिया की ये धुआंधार सभाएं, उस अंतर को बढाने के लिए हैं. लेकिन जिस अंदाज में प्रियदर्शिनी का प्रचार और मतदाता के बीच उनकी स्वीकार्यता है वो ये बता रही है सिंधिया परिवार में एक और नेतृत्व तैयार है.

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First published: May 4, 2019, 11:20 AM IST
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