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कोटा बैराज से चंबल नदी में छोड़ा 1 लाख 70 हजार क्यूसेक पानी, दर्जनों गांव टापू में तब्दील

भिंड में चंबल खतरे के निशान से 3 मीटर से ऊपर अधिक पानी बह रहा है.

भिंड में चंबल खतरे के निशान से 3 मीटर से ऊपर अधिक पानी बह रहा है.

चंबल संभाग के भिंड, मुरैना एवं श्योपुर जिलों में चंबल किनारे के गांवों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है.

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पश्चिमी मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में लगातार हो रही तेज बारिश के चलते कोटा बैराज डैम से चंबल नदी में एक लाख सत्तर हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. इसके चलते चंबल नदी पूरी तरह उफान पर है. चंबल संभाग के भिंड, मुरैना एवं श्योपुर जिलों में चंबल किनारे के गांवों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है. इस समय चंबल नदी खतरे के निशान से लगभग 3 मीटर ऊपर बह रही है. इसके चलते भिंड जिले के अटेर क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव टापू में तब्दील हो गए हैं. चंबल से लगे हुए राजस्थान के भी दर्जनों गांवों की हालत खस्ता है. इन गांवों में पहुंचने का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है. कई गांव के रास्तों पर तो 6 फीट तक पानी भर गया है. इन गांवों के लोग ना कहीं जा सकते हैं और न ही कोई बाहर से इन गांवों तक पहुंच सकते हैं.

चंबल संभाग में नहीं हुई ज्यादा बारिश

Chambal-चंबल
चंबल संभाग के भिंड, मुरैना एवं श्योपुर जिलों में चंबल किनारे के गांवों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है.


टापू में तब्दील हो चुके इन गांवों के लोगों को कोई जरूरी काम होता है तब उन्हें पानी में तैर कर रास्ता पार करना पड़ रहा है. दरअसल इस वर्ष चंबल संभाग में बारिश तो ज्यादा नहीं हुई लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में अधिक वर्षा के चलते कोटा बैराज डैम के गेट खोले जाने से चंबल नदी में पानी बढ़ गया है.

खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर बह रही है चंबल

चंबल में पानी छोड़े जाने से मुरैना जिले में पुराने पुल के ऊपर से पानी बह रहा है. वहीं भिंड में चंबल खतरे के निशान से 3 मीटर से ऊपर अधिक पानी बह रहा है. प्रशासन द्वारा सुरक्षा के इंतजामों की बात तो कही जा रही है लेकिन न्यूज 18 के इस संवाददाता को मौके पर चंद पुलिसकर्मियों के अलावा एनडीआरएफ या प्रशासन का कोई व्यक्ति नहीं मिला.

6 फीट पानी में डूबकर गांव पहुंच रहे हैं लोग

यहां पर जान जोखिम में डालकर लोग 6 फीट पानी में डूबकर गांव पहुंच रहे हैं. वही महिलाएं भी पानी में डूब चुके हैंडपंप से पानी भरने को मजबूर हैं क्योंकि पीने का पानी एक मात्र हैंडपंप से ही आता है. ऐसे में प्रशासन के दावों की पोल खुलती दिखाई दे रही है. हमारी टीम दो घंटे से ज्यादा मौके पर रही लेकिन इस दौरान प्रशासन का कोई भी व्यक्ति मौके पर नहीं पहुंचा.

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