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दाता बंदी छोड़ गुरुद्नारा का 400 वां प्रकाश पर्व : गुरु हरगोविंद सिंह ने जब मुगल बादशाह जहांगीर के सामने रखी ये शर्त...

गुरुद्वारा के 400 वर्ष पूर्ण होने पर गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ में तीन दिन का प्रकाश पर्व किया गया

गुरुद्वारा के 400 वर्ष पूर्ण होने पर गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ में तीन दिन का प्रकाश पर्व किया गया

Gwalior : गुरु हरगोविंद सिंह (Guru Hargovind Singh) ने मुगल शासकों के खिलाफ हथियार उठाकर अकाल तख्त की स्थापना की. इससे मुगल शासक जहांगीर बौखलाया हुआ था. उसने चालाकी से गुरु हरगोविंद सिंह को बंदी बनाया और ग्वालियर किले में 2 साल 3 महीने तक कैद रखा. ये गुरुद्वारा गुरु की याद में बनाया गया है.

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ग्वालियर. ग्वालियर (Gwalior) के प्रसिद्ध दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा में प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है. गुरु हर गोविंद सिंह की याद में बनाए गए इस गुरुद्वारा की स्थापना के 400 साल पूरा होने पर तीन दिन का ये प्रकाश पर्व (Prakash parv) मनाया जा रहा है. इस गुरुद्वारा की स्थापना के पीछे गुरु और जहांगीर से जुड़ा रोचक किस्सा है.

ग्वालियर की पावन धरा कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाओं की गवाह रही है. यहां से सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह का गहरा नाता रहा है. मुगल शासक जहांगीर ने ग्वालियर किले में गुरु हरगोविंद सिंह को नजरबंद करवा दिया था. उन्होंने जहांगीर की कैद में तकरीबन 2 साल 3 महीने गुजारे थे. यहां सिख धर्म का महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ उन्हीं की याद में बनाया गया है.

52 राजा रिहा
जब गुरु यहां से रिहा हुए तो उन्होंने अपने साथ कैद 52 हिंदू राजाओं को जहांगीर की कैद से मुक्त कराया था. उस घटना के 400 वर्ष पूर्ण होने पर ग्वालियर किले पर स्थित गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ पर प्रकाश पर्व चल रहा है. इसमें शामिल होने देश विदेश से लाखों श्रद्धालु गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ पहुंच रहे हैं. सीएम शिवराज भी आज इसमें शामिल हो रहे हैं.

हर गोविंद सिंह 2 साल 3 महीने रहे बंदी
सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह को मुगल शासक जहांगीर ने छल से बंदी बना लिया था और फिर यहां ग्वालियर के किले में नजर बंद कर दिया था. मुगल शासन काल में ग्वालियर किले को मुगल शासक कैद खाने के रूप में इस्तेमाल किया करते थे. गुरु हरगोविंद सिंह ने मुगल शासकों के खिलाफ हथियार उठाकर अकाल तख्त की स्थापना की. इससे मुगल शासक बौखलाए हुये थे. उन्होंने चालाकी से गुरु हरगोविंद सिंह को ग्वालियर किले में नजर बंद करके रख कर लिया. वो यहां 2 साल 3 महीने तक कैद रहे. गुरु हर गोविंद सिंह अपनी कैद के दौरान रोजाना यहां अरदास और संगत करते थे. उसी जगह उनकी याद में गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ स्थापित किया गया. ये सिख धर्म के लोगों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है.

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जब जहांगीर बीमार पड़ा…
2 साल से अधिक समय बीत गया और गुरु हरगोविंद सिंह को जहांगीर ने रिहा नहीं किया. कहते हैं उसी दौरान जहांगीर की तबीयत बिगड़ने लगी. तब उसकी पत्नी नूरजहां परेशान होकर किसी पीर के पास पहुंचीं. पीर ने नूरजहां से कहा कि जहांगीर ने किसी संत को अपनी कैद में रखा है. जब तक वह उन्हें आजाद नहीं करेगा तब तक उनकी तबीयत ठीक नहीं होगी. इसके बाद नूरजहां ने जहांगीर से हरगोविंद सिंह को रिहा करने की गुहार लगाई. लेकिन हरगोविंद सिंह ने अकेले रिहा होने से इंकार कर दिया. उन्होंने जहांगीर से मांग रखी कि उनके साथ जितने भी हिंदू राजा उसने यहां कैद कर रखे हैं, उन सबको छोड़ा जाए,तभी वो बाहर निकलेंगे.

52 कलियों का चोला
जहांगीर यह सुनकर बेचैन हो गया. उसे डर था कि कहीं उसकी कैद से रिहा होने के बाद हिंदू राजा उसके विरुद्ध बगावत न कर दें. इसलिए उन राजाओं की रिहाई में अड़ंगा लगाने के लिए उसने गुरु के सामने यह शर्त रखी कि जितने राजा उनके चोले की कलियां पकड़कर बाहर आएंगे उन्हें रिहा कर दिया जाएगा. गुरु ने राजाओं को रिहा कराने के लिए 52 कलियों का चोला सिलवाया. उन्हें पकड़ कर सभी 52 हिंदू राजा उनके साथ रिहा हो गए.

दाता बंदी छोड़
बस उसके बाद ग्वालियर में उनकी याद में ये गुरुद्वारा बनाया गया, जिसका नाम गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ रखा गया. कहते हैं कि ग्वालियर किले से जितने भी हिंदू राजा हर गुरु हरगोविंद सिंह के साथ रिहा हुए थे. वह सभी पैदल अमृतसर तक गए थे ,जहां उनका स्वागत आतिशबाजी और दीप जलाकर किया गया था.

कीर्तन, लंगर और कोरोना वैक्सीनेशन
गुरुद्वारा के 400 वर्ष पूर्ण होने पर गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ में तीन दिन का प्रकाश पर्व किया गया. इसमें अखंड पाठ, साहिब कीर्तन और लंगर के साथ कोविड-19 गाइडलाइन के विशेष इंतजाम किए गए. यहां  श्रद्धालुओं का वैक्सीनेशन भी किया गया.

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