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'गोडसे समर्थक' बाबूलाल चौरसिया ने गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण तो बिफरे कांग्रेसी, गंगाजल से धोया

चौरसिया मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की मौजूदगी में दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए हैं. (फाइल फोटो)

चौरसिया मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की मौजूदगी में दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए हैं. (फाइल फोटो)

नाथूराम गोडसे की कथित तौर पर प्रतिमा स्थापित करने वाले बाबूलाल चौरसिया के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर मध्य प्रदेश में तेज हुई सियासत थम नहीं रही. चौरसिया पहले भी कांग्रेस पार्टी के सदस्य रह चुके हैं.

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ग्वालियर. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के हत्यारे नाथूराम गोडसे की अर्धप्रतिमा की स्थापना में कथित तौर पर शामिल रहे ग्वालियर नगर निगम के पार्षद बाबूलाल चौरसिया (Babulal Chaurasia) ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद शनिवार को यहां राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. लेकिन चौरसिया के पार्टी में शामिल होने का विरोध करने वाले नेताओं ने एक दिन बाद इस प्रतिमा का गंगाजल से ‘शुद्धिकरण’ किया. रविवार की शाम को कांग्रेस नेता रूपेश यादव सहित पार्टी के कुछ कार्यकर्ता ग्वालियर के फूलबाग मैदान में स्थित गांधी पार्क पहुंचे और उन्होंने प्रतिमा पर गंगाजल (Ganga water) का छिड़काव कर उसे ‘शुद्ध’ किया और कहा कि वह चौरसिया का विरोध तब तक करते रहेंगे, जब तक उसे पार्टी से नहीं निकाला जाएगा.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौके पर ‘महात्मा गांधी अमर रहे’ और ‘गोडसे मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए. महात्मा गांधी की प्रतिमा का शुद्धिकरण करने के बाद कांग्रेस नेता रूपेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘‘बाबूलाल चौरसिया पहले कांग्रेसी थे, लेकिन अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते हिंदू महासभा में गए और फिर उन्होंने गोडसे की पूजा की. ऐसे व्यक्ति का हृदय परिवर्तन होना आश्चर्य की बात है और अब वे फिर से राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं. ऐसा व्यक्ति गांधीवादी नहीं हो सकता.’’

रूपेश यादव ने बताया, ‘‘शनिवार को बाबूलाल चौरसिया ने इसी गांधी पार्क में आकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया था, जिसके कारण यह प्रतिमा अशुद्ध हो गई थी. इसीलिए आज रविवार को अपने साथियों के साथ पहले हमने गंगाजल से गांधी प्रतिमा को शुद्ध किया और बाद में उनको श्रद्धासुमन अर्पित किए.’’



उन्होंने कहा, ‘‘हमारा विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक चौरसिया को कांग्रेस पार्टी से बाहर नहीं कर दिया जाता.’’ मालूम हो कि ग्वालियर में कुछ साल पहले हिन्दू महासभा के कार्यालय में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की अर्धप्रतिमा की स्थापना में कथित तौर पर शामिल रहे ग्वालियर नगर निगम के पार्षद बाबूलाल चौरसिया को तीन दिन पहले कांग्रेस में शामिल हुये हैं. लगभग छह साल पहले कांग्रेस छोड़ चुके चौरसिया मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की मौजूदगी में दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी सियासत तेज


बाबूलाल चौरसिया की पार्टी में वापसी ने कांग्रेस के भीतर हलचल पैदा कर दी है. कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ‘‘गोडसे अनुयायी’’ को पार्टी में लेने पर सवाल उठाया है जबकि कुछ अन्य नेताओं ने यह कहते हुए इस निर्णय को सही ठहराया कि चौरसिया ने हिंसा की विचारधारा छोड़ दी है और बापू के दिखाये सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का फैसला किया है. वहीं, चौरसिया ने कांग्रेस में अपनी वापसी को ‘‘ घर वापसी’’ करार दिया था और दावा किया था कि हिन्दू महासभा के नेताओं ने उसे गुमराह किया था और इस कारण उन्होंने गोड़से की प्रतिमा की स्थापना और पूजा की थी.

नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाने का आरोप


चौरसिया को कांग्रेस में शामिल करने का विरोध करते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा था, ‘‘ बापू हम शार्मिदा हैं.’’ यादव ने कहा, ‘‘पार्टी कहां जा रही है? पार्टी को मजबूत करने के नाम पर गोड़से के अनुयायी को शामिल करने की जरूरत क्यों है? हम इस फैसले पर शर्मिदा हैं.’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से गांधीजी की विचारधारा के लिये लड़ी और अब उन लोगों को शामिल कर रही है जिन्होंने उस विचारधारा को मार डाला और ग्वालियर शहर में नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाया था.
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