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दहेज में रॉल्स रॉयस के लिए सिंधिया राजवंश की करीबी महिला को ससुरालवालों ने छोड़ा, FIR दर्ज

दहेज में एंटीक रॉल्स रॉयस की मांग को लेकर सिंधिया राजवंश की करीबी महिला को ससुरालवालों ने छोड़ा. (प्रतीकात्मक तस्वीर रॉल्स रॉयस कार)

दहेज में एंटीक रॉल्स रॉयस की मांग को लेकर सिंधिया राजवंश की करीबी महिला को ससुरालवालों ने छोड़ा. (प्रतीकात्मक तस्वीर रॉल्स रॉयस कार)

ग्वालियर का आंग्रे परिवार सिंधिया राजवंश के करीब है. सरदार संभाजी राव आंग्रे की पोती कात्यायनी ने ससुरालवालों के खिलाफ FIR कराई है. हालांकि, ससुराल पक्ष सालभर पहले ही उनके खिलाफ भी शिकायत दर्ज करा चुका है.

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ग्वालियर. सिंधिया राजवंश के करीबी रहे भाजपा नेता सरदार संभाजी राव आंग्रे की पोती ने पति और ससुरालवालों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया है. आंग्रे की पोती कात्यायनी ने आरोप लगाया है कि उसका ससुराल उसे लेने नहीं आ रहा है, क्योंकि उन्हें एंटीक रॉल्स रॉयस और एक फ्लैट चाहिए. हालांकि, कात्यायनी के ससुरालवालों ने भी पहले से ही आंग्रे परिवार के खिलाफ मामला दर्ज किया हुआ है. मामले की जांच चल रही है.

FIR में कात्यायनी ने बताया कि इंदौर निवासी अर्जुन काक के उनका विवाह हुआ था. शादी के बाद पति अर्जुन काक ने मकान बनने का बहाना बनाकर उन्हें मायके भेज दिया था. उनके परिवार ने अर्जुन से  उनको ले जाने के लिए कहा तो अर्जुन और उसके परिवार ने आंग्रे परिवार की पुश्तैनी संपत्ति के रूप में घर में रखी 2 करोड़ की एंटीक रॉल्स रॉयस और एक फ्लैट की मांग की.

शादी से ही इनकार करता है काक परिवार



कात्यायनी ने बताया कि उनके परिवार के बार-बार मनाने पर भी अर्जुन और उनके पिता अनिल काक नहीं माने. इसके बाद बुधवार रात महिला थाने मे दहेज एक्ट में FIR दर्ज करवा दी. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. आपको बता दें कि अर्जुन काक ने भी ग्वालियर के विश्वविद्यालय थाना में कात्यायनी सहित उनके परिजनों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवा रखा है. काक परिवार ने कात्यायनी द्वारा पेश किए गए मैरिज सर्टिफिकेट को फर्जी बताते हुए शादी होने से ही इनकार किया था.
यह है पूरा मामला

अर्जुन से सरदार आंग्रे की पोती का विवाह 18 अप्रैल 2018 को हुआ था. मामला पहले मीडिएशन सेल में गया फिर कोर्ट तक पहुंचा. नवंबर 2019 में अर्जुन नें ग्वालियर एसपी को शिकायत की थी. अर्जुन  इंदौर स्थित धार कोठी 64/67 के रहने वाले हैं. उनके पिता कर्नल अनिल सिंह हैं. अर्जुन ने एसपी को बताया कि उनके पिता सेना से सेवानिवृत हैं. मां इंदौर राजघराने की सदस्य हैं. अर्जुन इंदौर में प्रोग्रेसिव एजुकेशन-111 नाम से शैक्षणिक संस्थान का संचालन करते हैं. उनका आरोप है कि ग्वालियर के सिंधिया राजघराने से जुड़े सरदार संभाजी राव आंग्रे (अब नहीं हैं) के पुत्र तुलाजीराव आंग्रे, अपनी पत्नी श्यामभावी के साथ इंदौर निवासी सुखवंत सिंह, राजेन्द्र चौबे के माध्यम से मार्च 2018 में मेरे घर आए थे. उन्होंने अपनी पुत्री कात्यायनी आंग्रे (32) का विवाह मेरे साथ करने की इच्छा व्यक्त की थी.

शादी के लिए भी दबाव डाल रहा था आंग्रे परिवार

अर्जुन ने आरोप लगाया कि उनके ससुराल के काफी दबाव के बाद मेरे परिजन ने नवंबर 2018 में शादी की सहमति दी थी. यह तय किया था कि ग्वालियर कोर्ट में शादी होगी. उसके बाद दोनों परिवारों की हैसियत से समारोह इंदौर में होगा. पर अप्रैल 2018 में तुलाजीराव उनके घर आए और बताया कि कात्यायनी की पत्रिका में मंगलदोष है. इसके लिए अक्षय तृतीया को मंगलदोष पूजा का उपाय उनके गुरु पंडित अनिल अठाले निवासी बताशे वाली गली जनकगंज ने बताया है. इस पर 18 अप्रैल 2018 को इंदौर में पूजा का कार्यक्रम तय हुआ. सब कुछ तय होने के बाद अचानक तुलाजीराव ने आकर बताया कि उनके गुरु ने ऋषिकेश उत्तराखंड में पूजा का प्रस्ताव रखा है. वहीं गुरु आश्रम में पूजा उत्तम रहेगी. साथ ही वहीं सगाई का समारोह भी कर लेंगे. अचानक कार्यक्रम बदलने और कोई विकल्प नहीं छोड़ने पर भी मेरे परिजन मान गए.

सगाई को सांकेतिक विवाह करार दिया

अर्जुन सिंह ने पुलिस को आवेदन में आगे बताया कि 17 अप्रैल 2018 को उसके माता-पिता के साथ वह ऋषिकेश पहुंचे. यहां डिवाइन रिसोर्ट होटल में ठहरे और 20 अप्रैल तक रुके थे. 18 अप्रैल 2018 को मंगलदोष पूजा के बाद सगाई हुई. जिसमें मेरी मां-पिता की ओर से बेशकीमती गहने व रिश्तेदारों ने भी उपहार दिए. इसके बाद आंग्रे परिवार ने इस सगाई को सांकेतिक विवाह बताया और इसी को शादी मानने के लिए कहा गया. इस पर माहौल न बिगड़े तो अर्जुन के परिवार ने इसे भी कबूल कर लिया. साथ ही ऋषिकेश उत्तराखंड के नियमों के तहत विवाह पंजीयन व प्रमाण पत्र के लिए आंग्रे परिवार से कहा.

इस तरह खुला मामला

इसके बाद तुलाजीराव आंग्रे ने विवाह प्रमाण पत्र के लिए कुछ दस्तावेज इंदौर भेजे, जिसमें पंजीयन स्टाम्प थे। हमने हस्ताक्षर कर दिए. जून 2018 में विवाह का प्रमाण पत्र भेजा गया, जिसे देखकर हम लोग दंग रह गए. ऋषिकेश में सांकेतिक शादी हुई थी, जबकि प्रमाण पत्र ग्वालियर नगर निगम से बनवाकर भेजा गया. इसके बाद पूरी धोखाधड़ी का अहसास हुआ. इसके बाद सूचना के अधिकार के तहत जानकारी निकाली गई तब फर्जीवाड़े का पता लगा. इस दौरान कात्यायनी से कोई संबंध नहीं रहा है.
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