जाने क्या रंग लेगी सिंधिया-पवैया की मुलाकात, कभी राज परिवार की जीत के आड़े आ गए थे ये पूर्व मंत्री

बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और जयभान सिंह पवैया की मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं. (File)

बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और जयभान सिंह पवैया की मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं. (File)

आज बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया की मुलाकात होगी. पवैया हमेशा सिंधिया परिवार के खिलाफ रहे हैं. देखना ये है कि ये मेल-मुलाकात क्या रंग लेती है.

  • Last Updated: June 11, 2021, 11:32 AM IST
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ग्वालियर. ग्वालियर चंबल के इतिहास में दो कट्टर सियासी विरोधियों के बीच शुक्रवार को अहम मुलाकात होगी. एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया के घर राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया शाम को मुलाकात करने जाएंगे. सिंधिया जय भान सिंह पवैया के पिता के निधन पर शौक संवेदनाएं देने जा रहे हैं.

लेकिन, ग्वालियर चंबल के इतिहास में यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है. बता दें कि जयभान सिंह पवैया ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके पिता माधवराव सिंधिया के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़े थे. दोनों ही चुनाव में पवैया ने सिंधिया परिवार को जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगवा दिया था.

अब कोई भिन्नता नहीं - तोमर

ग्वालियर के दो दिवसीय दौरे पर आए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया शाम करीब 7:00 बजे पूर्वमंत्री जय भान सिंह पवैया के घर जाएंगे.  सिंधिया की पवैया से होने वाली यह मुलाकात ग्वालियर चंबल की सियासत में चर्चा का विषय बनी हुई है. दरअसल पवैया के पिता बलवंत सिंह पवैया का 20 अप्रैल को निधन हुआ था. एक ही पार्टी में होने के नाते सिंधिया शोक जताने के लिए भगत सिंह नगर स्थित पवैया के बंगले जाएंगे. इस मुलाकात को लेकर सिंधिया के कट्टर समर्थक ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि सिंधिया परिवार और जय भान सिंह पवैया के बीच राजनीतिक मतभिन्नता रही, लेकिन व्यक्तिगत मतभिन्नता नहीं थी. अब दोनों एक ही पार्टी में हैं. ऐसे में राजनीतिक मतभिन्नता भी खत्म हो गई है.
सिंधिया परिवार के खिलाफ मुखर रहे हैं पवैया

बता दें, जयभान सिंह पवैया और सिंधिया परिवार के बीच सियासी अदावत पिछले 23 साल से चली आ रही है. सन 1998 में जय भान सिंह पवैया ने कांग्रेस नेता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के खिलाफ ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में सिंधिया और पवैया के बीच कड़ा मुकाबला हुआ. माधवराव सिंधिया 28 हज़ार वोट से इस चुनाव को जीते थे. माधवराव सिंधिया ने इस बेहद मामूली जीत के बाद नाराज़ होकर आगे ग्वालियर से चुनाव नहीं लड़ा. उसके बाद माधवराव सिंधिया गुना चले गए.

ज्योतिरादित्य को दी थी कड़ी टक्कर



माधवराव के बाद पवैया और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच भी यह सियासी अदावत जारी रही. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में गुना लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ जयभान सिंह पवैया ने भाजपा से चुनाव लड़ा. यहां भी कांटे का मुकाबला हुआ. चार लाख से जीतने वाले सिंधिया की जीत एक लाख बीस हज़ार पर सिमट गई थी.

राजमाता के करीब रहे पवैया

जयभान सिंह पवैया की माधवराव से अदावत रही. लेकिन, पवैया राजमाता विजयाराजे सिंधिया के करीब रहे हैं. पवैया स्वर्गीय राजमाता से जनसंघ से लेकर भाजपा तक  सम्पर्क में रहे. बजरंगदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के दौरान  बाबरी आंदोलन में अगुआ रहे. हालांकि, यशोधरा राजे सिंधिया और पवैया दोनों के बीच भी सियासी रिश्ते सामान्य रहे हैं.

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