मरीज़ों को बाहर से ख़रीदना पड़ती हैं दवाइयां, प्रशासन लैप्स कर रहा है बजट

अस्पताल में जिस बजट से ये ज़रूरी सुविधाएं मुहैया करायी जाना थीं वो सारा लैप्स हो गया है. मरीज़ छोटी-छोटी चीज़ों के लिए परेशान होते रहते हैं.

Sushil Koushik | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 12, 2019, 8:07 AM IST
मरीज़ों को बाहर से ख़रीदना पड़ती हैं दवाइयां, प्रशासन लैप्स कर रहा है बजट
अस्पताल में जिस बजट से ये ज़रूरी सुविधाएं मुहैया करायी जाना थीं वो सारा लैप्स हो गया है. मरीज़ छोटी-छोटी चीज़ों के लिए परेशान होते रहते हैं.
Sushil Koushik | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 12, 2019, 8:07 AM IST
एमपी में सरकार शिवराज की हो या फिर कमलनाथ की, इससे सरकारी मशीनरी पर जरा भी फर्क नही पड़ रहा है. अफसरों का बेपरवाह रवैया हर सरकार में जारी है. इसकी बानगी ग्वालियर में देखने को मिल रही है, जहां अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य अस्पताल प्रबंधन की गलती से 19 करोड़ 62 लाख रूपए का बजट लेप्स हो गया. ये वो पैसा है, जिससे मरीजों की दवाओं से लेकर अलग-अलग व्यवस्था पर खर्च किया जाना था.
प्रशासन की लापरवाही- मध्य प्रदेश शासन ने साल 2018-19 में जयारोग्य चिकित्सालय समूह को अलग-अलग 8 मदों में मरीज़ और स्टाफ की सुविधा के लिए बजट दिया था. बजट लैप्स हुआ तो कमिश्नर बीएम शर्मा ने काम में लापरवाही बरतने जयारोग्य चिकित्सा समूह के प्रशासकीय अधिकारी अनिल सारस्वत और अधीक्षक डॉ. अशोक मिश्रा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा.
इस पर जवाब आया कि अस्पताल का बजट लैप्स नही हुआ है, बल्कि पोर्टल में टेक्निकल फॉल्ट होने के कारण और वित्तीय वर्ष खत्म होने के कारण सरेंडर किया गया है. मरीजों के लिए बाजार से दवाएं लाने के लिए मजबूर करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.


ये है ब्यौरा

मेडिसिन में-17.15 करोड़: हृदयघात के दौरान लगने वाले इंजेक्शन, इंसुलिन इंजेक्शन, मैरोपेनम इंजेक्शन, आईबीपी जांच का इंजेक्शन सहित कई आवश्यक मरीजों से बाजार से मंगवाई जा रही हैं.
-फर्नीचर मद-10 लाख: ओपीडी में डॉक्टरों के पास बैठने के लिए अच्छा फर्नीचर नहीं है. यहां मरीजों को खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता है.
-प्रिटिंग कार्य-3 लाख: ओपीडी का पर्चे और कट्टे कम संख्या में छपवाए जाते हैं. इसलिए कई बार हाथ से कट्टा काटकर देना पड़ता है.
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-भोजन मद-1.75 करोड़: मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की क्वालिटी पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. पिछले दिनों मरीज़ के खाने में कीड़ा निकला था.
-मशीनरी,सयंत्र- 9.61 लाख: ट्रॉमा सेंटर में आधे वेंटिलेटर खराब हैं. डिजिटल एक्सरे मशीन भी आए दिन खराब हो जाती हैं. अल्ट्रासाउंड मशीन की कमी है, जिससे वेटिंग चल रही है.
-अन्य प्रभार में- 2.88 लाख: गरीबी रेखा के कार्डधारी मरीजों की एमआरआई का सितंबर से भुगतान नहीं किया है. इससे अस्पताल प्रशासन पर 72 लाख की उधारी हो गई है.। ऑपरेशन के इंप्लांट मरीजों से मंगवाए जा रहे हैं.
अस्पताल में जिस बजट से ये ज़रूरी सुविधाएं मुहैया करायी जाना थीं वो सारा लैप्स हो गया है. मरीज़ छोटी-छोटी चीज़ों के लिए परेशान होते रहते हैं.

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