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ग्वालियर: शीतकालीन विधानसभा सत्र पर डॉ. गोविंद सिंह ने उठाए सवाल, शिवराज के मंत्री बोले-सत्र की चिंता छोड़ खुद की फिक्र करें

मध्‍य प्रदेश के तीन दिन के शीतकालीन विधानसभा सत्र को लेकर कांग्रेस और भाजपा में घमासान.
मध्‍य प्रदेश के तीन दिन के शीतकालीन विधानसभा सत्र को लेकर कांग्रेस और भाजपा में घमासान.

मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) में तीन दिन के शीतकालीन विधानसभा सत्र आयोजित होने पर पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह (Dr. Govind Singh) ने आपत्ति जताई है. उन्‍होंने कहा कि तीन में जनता की समस्यओं और विकास के मुद्दों पर बात नही हो पाएगी. जबकि उनकी इस आपत्ति शिवराज सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर (Pradhuman Singh Tomar) ने चुटकी ली है.

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ग्वालियर. मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता डॉक्टर गोविंद सिंह (Dr. Govind Singh) ने आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र को लेकर आपत्ति जताई है. उन्‍होंने कहा कि तीन दिन के सत्र में जन समस्याओं और विकास के मुद्दों पर सुनवाई नहीं हो पाएगी. गोविंद सिंह के मुताबिक, कोरोना संकट, किसान समस्या और बेरोजगारी समस्या पर चर्चा होनी है और सत्र को छोटा कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है. जबकि डॉक्टर गोविंद सिंह के बयान पर कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर (Pradhuman Singh Tomar) ने चुटकी ली है.

शिवराज के मंत्री ने कही ये बात
शिवराज सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि प्रदेश सरकार कोरोना के साथ ही जनता के मुद्दों के लिए काम कर रही है. तीन दिन के विधानसभा सत्र में सभी जरूरी मुद्दों पर बात होगी. इसके साथ उन्‍होंने पूर्व मंत्री गोविंद सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी (गोविंद सिंह) बात उनकी पार्टी के लोग ही नहीं सुनते, लिहाजा उनको विधानसभा सत्र की चिंता छोड़ खुद की फिक्र करनी चाहिए. तोमर ने साथ ही कहा, 'सब जानते हैं कि कांग्रेस में डॉक्‍टर गोविंद सिंह के खिलाफ किस तरह का षड्यंत्र चल रहा है.

विधानसभा सत्र के हंगामेदार होने की संभावना
बहरहाल, मध्‍य प्रदेश के विधानसभा सत्र को लेकर डॉक्‍टर गोविंद सिंह की आपत्ति और उस पर प्रद्युम्न सिंह तोमर के पलटवार के बाद माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तगड़ी बहस होगी, जिसका असर शायद जनता के मुद्दों पर पड़ेगा.



आपको बता दें कि मध्‍य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का बेहद करीबी माना जाता है. यही नहीं, महाराज के इशारे पर कांग्रेस छोड़ने वाले 22 विधायकों में प्रद्युम्न सिंह तोमर भी शामिल थे और इसी वजह से कमलनाथ की 15 महीने पुरानी सरकार का पतन हो गया था. इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर मुख्‍यमंत्री की कुर्सी संभाल ली.
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