पांच माह की लंबी वेटिंग है कड़कनाथ मुर्गे के चूजों की

ग्वालियर के कृषि महाविद्यालय पिछले एक साल के दौरान ही कड़कनाथ मुर्गों की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि पांच महीने से पहले किसी को इसके चूजे नहीं मिल पा रहे हैं. मुर्गी पालन को अपना व्यवसाय बनाने वाले लोग इस कम खर्चीले वह बेहद महंगे दामों पर बिकने वाले कड़कनाथ मुर्गे के चूजों को पाने के लिए वेटिंग में है.

Mahesh Shivhare | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 12, 2018, 5:09 PM IST
पांच माह की लंबी वेटिंग है कड़कनाथ मुर्गे के चूजों की
कड़कनाथ मुर्गा
Mahesh Shivhare | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 12, 2018, 5:09 PM IST
ग्वालियर के कृषि महाविद्यालय पिछले एक साल के दौरान ही कड़कनाथ मुर्गों की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि पांच महीने से पहले किसी को इसके चूजे नहीं मिल पा रहे हैं. मुर्गी पालन को अपना व्यवसाय बनाने वाले लोग इस कम खर्चीले वह बेहद महंगे दामों पर बिकने वाले कड़कनाथ मुर्गे के चूजों को पाने के लिए वेटिंग में है. दरअसल राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकीय संस्थान द्वारा इस नस्ल को मान्यता दी गई है जिसके चलते ग्वालियर के कृषि महाविद्यालय में इन चूजों का रखरखाव किया जा रहा है.

फिलहाल कई चूजे वयस्क हो चुके हैं. वनवासियों द्वारा मुख्य रूप से इन कड़कनाथ मुर्गों का पालन किया जाता है. लेकिन अब मुनाफा देखते हुए शहर के मुर्गी पालन उद्योग से जुड़े लोग भी बड़ी संख्या में इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं. प्रदेश के साथ यूपी, राजस्थान और दिल्ली सहित अन्य राज्यों से भी यहां से कडकनाथ के चूजों को भेजा जाता है और इसे लोग बहुत पसंद कर रहे हैं. गर्मी के मौसम में चूजे तैयार नहीं होने से बेटिंग साढ़े पांच हजार तक बढ़ गई है.

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक निरंतर मुर्गो का उत्पादन बढाने का प्रयास कर रहे हैं. कृषि विज्ञान केंद्र में एक हेचरी हैं और इसमें एक बार में लगभग पांच सौ चूजें तैयार होते हैं. तीन चार माह पहले एक बड़ी हेचरी को मंजूरी मिल गई है लेकिन यह अभी शुरू नहीं हो पाई है. इसके शुरू होने के बाद एक बार में लगभग डेढ हजार चूजे एक बार में तैयार हो जाएंगे.
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