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हिंदू महासभा के नेता का दावा- बापू की हत्या के लिए गोडसे ने ग्वालियर में की थी गोली चलाने की रिहर्सल
Gwalior News in Hindi

Sushil Koushik | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 30, 2020, 1:42 PM IST
हिंदू महासभा के नेता का दावा- बापू की हत्या के लिए गोडसे ने ग्वालियर में की थी गोली चलाने की रिहर्सल
महात्मा गांधी की हत्या के लिए गोडसे ने ग्वालियर में की थी गोली मारने की रिहर्सल

नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) ने जिस पिस्टल से महात्मा गांधी की हत्या की थी, वो पिस्टल (pistol) सिंधिया राजवंश की सेना के एक अफसर की थी. ये दावा हिंदू महासभा के नेता डॉ. जयवीर भारद्वाज ने किया है.

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ग्वालियर. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की हत्या की साजिश ग्वालियर (Gwalior) में रची गई थी. ग्वालियर से ही नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) ने पिस्टल (pistol) खरीदी और इसे चलाने की रिहर्सल भी ग्वालियर में ही की थी. इस काम में हिंदू महासभा (Hindu Mahasabha) के नेताओं ने उसकी मदद की थी. गोडसे ने जिस पिस्टल से महात्मा गांधी की हत्या की थी, वो पिस्टल सिंधिया राजवंश की सेना के एक अफसर की थी. ये दावा हिंदू महासभा के नेता डॉ. जयवीर भारद्वाज का है.

स्वर्णरेखा के किनारे पिस्तौल चलाने की प्रैक्टिस
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. गांधीजी की हत्या की तैयारी नाथूराम गोडसे ने ग्वालियर में ही की थी. हिंदू महासभा के राष्ट्रीय पदाधिकारी डॉ. जयवीर भारद्वाज का दावा है कि गोडसे ने स्वर्ण रेखा नदी के किनारे पिस्टल से गोली चलाने की प्रैक्टिस की थी. उस दौरान वो तीन दिन तक अपने साथी के साथ ग्वालियर में रुका था. दरअसल ग्वालियर हिंदू महासभा का गढ़ था. यही वजह थी कि गोडसे को यहां मदद मिली थी.

हिंदू महासभा के राष्ट्रीय पदाधिकारी डॉ. जयवीर भारद्वाज के मुताबिक महात्मा गांधी की हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए नाथूराम गोडसे ने पूरी तैयारी ग्वालियर में ही की थी. उसकी इस साजिश में ग्वालियर के चार और लोग शामिल थे. नाथूराम गोडसे ग्वालियर इसलिए आया क्योंकि यह शहर महासभा की गतिविधियों का एक प्रमुख केन्द्र था. हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं के मुताबिक गोडसे ने पिस्टल से तीन-चार फायर किए थे. जब उसे भरोसा हो गया कि निशाना चूकेगा नहीं, तब वो अपने साथी आप्टे के साथ दिल्ली रवाना हो गया.

गांधीजी को प्रार्थना सभा में मारी थी तीन गोलियां
30 जनवरी 1948 की शाम 5 बजे महात्मा गांधी दिल्ली में प्रार्थना सभा के लिए निकले थे. उस दिन प्रार्थना में ज्यादा भीड़ थी. फौजी कपड़ों में नाथूराम गोडसे अपने साथियों करकरे और आप्टे के साथ भीड़ में घुल-मिल गया. महात्मा गांधी अपनी दो सहयोगियों आभा और तनु के साथ थे. गोडसे ने तनु और आभा को बापू के पैर छूने के बहाने एक तरफ किया. बापू के पैर छूते-छूते पिस्टल निकाल ली और तीन गोलियां महात्मा गांधी के शरीर में उतार दी थीं.

1949 में गोडसे को हुई थी फांसी15 नवंबर 1949 को जेल में नाथूराम गोडसे को फांसी दे दी गई थी. वरिष्ठ पत्रकार देवश्री माली का कहना है गोडसे ने जिस ग्वालियर में हिंदू महासभा की मिलीभगत से गांधी जी की हत्या की तैयारी की थी, उस जगह आज भी गोडसे की विचारधारा जिंदा है. यही वजह है कि गांधी की हत्या के वर्षों बाद भी कभी गोडसे की जयंती मनाने तो कभी मंदिर बनाने की खबरें आती रहती हैं.

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First published: January 30, 2020, 1:06 PM IST
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