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Gwalior News : व्यापम घोटाले के व्हिसल ब्लोअर की याचिका पर सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस

हाईकोर्ट ने सरकार से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है.
हाईकोर्ट ने सरकार से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है.

Gwalior : उच्च न्यायालय (HC) में दायर अपनी याचिका में आशीष चतुर्वेदी ने कहा है कि 'गैरकानूनी' हिरासत ने उनके बेदाग चरित्र और करियर को धूमिल कर दिया है.

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ग्वालियर.मध्य प्रदेश के कुख्यात व्यापम घोटाले (Vyapam scam) के व्हिसल ब्लोअर आशीष चतुर्वेदी की याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है. चतुर्वेदी ने याचिका में इस मामले में 2018 में खुद को 18 घंटे तक गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखने का आरोप लगाते हुए सरकार से मुआवजे की मांग की है.

उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ के न्यायाधीश एस ए धर्माधिकारी ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब देने के लिये कहा है.

कोर्ट ने लगाया था जुर्माना
चतुर्वेदी के अधिवक्ता डी पी सिंह ने बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, व्यापमं मामले में वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस ने चतुर्वेदी को 9 अगस्त, 2018 को बयान देने के लिये विशेष अदालत में पेश नहीं किया. चतुर्वेदी इस मामले में शिकायतकर्ता हैं.सिंह ने बताया कि पेश न होने पर अदालत ने उन पर 200 रुपये का जुर्माना लगाया और कहा अगर वह इसका भुगतान करने में विफल रहते हैं तो उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा.




कोर्ट के आदेश के बाद भी जेल
चतुर्वेदी के अधिवक्ता डी पी सिंह ने कहा 9 अगस्त 2018 को चतुर्वेदी ने शाम साढ़े चार बजे अदालत का कामकाज बंद होने से पहले जुर्माना जमा किया और अदालत ने आदेश दिया कि चतुर्वेदी को छोड़ दिया जाए. लेकिन याचिका में आरोप लगाया गया कि अदालत के निर्देश के बाद भी चतुर्वेदी को जेल भेज दिया गया, जहां व्यापम घोटाले के कुछ अन्य आरोपी भी बंद थे.सिंह ने बताया कि चतुर्वेदी अगले दिन '18 घंटे' के बाद जेल से बाहर निकले.

व्यापम घोटाला
उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में आशीष चतुर्वेदी ने कहा है कि 'गैरकानूनी' हिरासत ने उनके बेदाग चरित्र और करियर को धूमिल कर दिया है.मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल की भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में भारी गड़बड़ी के बाद व्यापम घोटाला सामने आया था.इस घोटाले से जुड़े कई आपराधिक मामले प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में दर्ज किये गये हैं.शुरुआत में प्रदेश पुलिस की एक स्पेशल टास्क फोर्स ने इस घोटाले की जांच की थी.लेकिन 2016 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस घोटाले की जांच कर रहा है. (भाषा)
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