ग्वालियर सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न, तोमर का ‌टिकट काटने से होगा फायदा?
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ग्वालियर सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न, तोमर का ‌टिकट काटने से होगा फायदा?
भाजपा प्रत्याशी विवेक सेजवलकर हैं.

अशोक सिंह को दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है. पिछले तीन बार से कांग्रेस उन्हें लगातार ग्वालियर सीट से टिकट दे रही है लेकिन उनके हिस्से में हार ही आई है.

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ग्वालियर ने देश को संगीत के महान साधक दिए तो सियासत के नायक भी दिए. ग्वालियर घराने और ख्याल घरानों से निकला संगीत आज देशभर में सरगम की गूंज रखता है तो ग्वालियर की मिट्टी से राजनीति के नामचीन चेहरों ने ग्वालियर को नई पहचान दी है. यही वजह है कि देश की हाईप्रोफाइल और वीवीआईपी लोकसभा सीटों में ग्वालियर शुमार करता है.

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी और सिंधिया परिवार की वजह से से ग्वालियर की अहमियत भारतीय राजनीति में बढ़ जाती है. ग्वालियर से अटल बिहारी वाजपेयी, राजमाता विजयराजे सिंधिया, यशोदाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया जैसे दिग्गज सांसद चुने जा चुके हैं.

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पिछले तीन लोकसभा चुनावों से यहां बीजेपी की लगातार जीत हो रही है. लेकिन इस बार ग्वालियर में कांटे की टक्कर दिखाई पड़ सकती है. इसकी बड़ी वजह ये है कि 15 साल बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका निभाई है.
उनके प्रभाव वाली लगभग सभी सीटों में कांग्रेस को जीत मिली है. यही वजह बीजपी के लिए मुश्किल तब खड़ी कर सकती जब कि लोकसभा चुनाव में भी ग्वालियर का वोटर विधानसभा चुनाव की तरह ही व्यवहार करे. वैसे भी ग्वालियर पर किसी राजनीतिक दल का उतना असर नहीं रहा जितना यहां पर ग्वालियर घराने का असर है.

भाजपा प्रत्याशी विवेक सेजवलकर हैं.


हालांकि साल 2001 में माधव राव सिंधिया के निधन के बाद ग्वालियर में बीजेपी मजबूत होना शुरू हुई. बीजेपी ने यहां से यशोदाराजे सिंधिया को उपचुनाव में टिकट दिया जिसमें वो विजयी हुईं और फिर उसके बाद साल 2009 में यशोदारजे सिंधिया को बीजेपी ने एक बार फिर टिकट दिया और वो चुनाव जीतीं.

ग्वालियर सीट पर कांग्रेस को 8 बार, बीजेपी को 4 बार और जनसंघ को 2 बार जीत मिली है. हालांकि पिछले 3 चुनावों से यहां बीजेपी जीतती आ रही है. इस बार भी यहां मुकाबला बीजेपी बनाम कांग्रेस है.

कौन हैं प्रत्याशी
ग्वालियर से वर्तमान में मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सांसद हैं. लेकिन इस बार बीजेपी ने नरेंद्र सिंह तोमर का टिकट काटकर विवेक सेजवलकर को मैदान में उतारा है.

कांग्रेस प्रत्याशी आशोक सिंह के प्रचार में राहुल गांधी रोड शो करते हुए


कौन हैं अशोक सिंह

अशोक सिंह को दिगविजय सिंह का करीबी माना जाता है. पिछले तीन बार से कांग्रेस उन्हें लगातार ग्वालियर सीट से टिकट दे रही है लेकिन उनके हिस्से में हार ही आई है. हालांकि अशोक सिंह के नाम से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे को टिकट देने की संभावना जताई जा रही थी.
ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र हैं. ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर दक्षिण, भितरवार, डबरा, करेरा, और पोहरी. यहां की आठ विधानसभा सीटों में से 7 पर कांग्रेस और 1 पर बीजेपी का कब्जा है.

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