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आजादी के 72 साल बाद भी नहीं बदली इस गांव की 'किस्‍मत', कलेक्‍टर ने लिया ये एक्‍शन

News18 Madhya Pradesh
Updated: October 3, 2019, 5:06 PM IST
आजादी के 72 साल बाद भी नहीं बदली इस गांव की 'किस्‍मत', कलेक्‍टर ने लिया ये एक्‍शन
आजादी के 72 साल बाद भी गांव में नहीं पहुंची लाइट. (फोटो साभार-फेसबुक)

ग्‍वालियर जिले (Gwalior District) की नगर निगम सीमा में मौजूद लोंडरा गांव (Londra Village) आजादी के 72 साल बाद भी अंधेरे में डूबा हुआ है. न्‍यूज़ 18 द्वारा गांव की बदहाली पर खबर दिखाए जाने के बाद जिला कलेक्टर अनुराग चौधरी (District Collector Anurag Chaudhary) ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.

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ग्वालियर. मध्‍य प्रदेश का ग्‍वालियर जिला (Gwalior District) अपनी खास पहचान रखता है, लेकिन जिले की नगर निगम सीमा में मौजूद एक गांव आज भी अंधेरे में डूबा हुआ है. प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Former Chief Minister Shivraj Singh Chauhan) की सरकार के समय इस गांव में लगाई गईं सोलर लाइट भी खराब हो गयी हैं, तो गांव तक पहुंचने का कोई अच्छा रास्ता भी नहीं है. जबकि न्‍यूज़ 18 द्वारा गांव की बदहाली पर खबर दिखाए जाने के बाद जिला कलेक्टर अनुराग चौधरी (District Collector Anurag Chaudhary) ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं. सच कहा जाए तो आजादी के 72 साल बाद भी इस गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी प्रशासन के मुंह पर तमाचा है.

कलेक्टर ने लिया ये एक्‍शन
जिला कलेक्टर अनुराग चौधरी ने निगम कमिश्नर को निर्देशित किया है कि वह लोंडरा गांव में सुविधाएं मुहैया कराएं. साथ ही गांव में बिजली, सड़क की जो समस्या है, उसे भी दूर करें. आपको बता दें कि इंडिया...अब न्यू इंडिया का बनने की राह पर है, बावजूद इसके ग्वालियर जिले का लौंडरा गांव आदिम युग की याद दिला रहा है. आजादी के 72 बरस बीत गए, लेकिन लोंडरा गांव में बिजली नहीं पहुंची है. अंधेरे में इस गांव में रहने वाले सवा सौ से ज्यादा लोग बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं.

रात काटना गांव वालों के लिए है सजा

यही वजह है कि गांव वालों के लिए गर्मी और बरसात में रात काटना किसी सज़ा से कम नहीं होता है. मच्छर और दूसरे जानवरों के प्रकोप से बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बीमार होते हैं. लाइट नहीं होने से घरों पंखे, टीवी की उम्मीद करना बेमानी होगा. हालांकि दो साल पहले गांव को रोशन करने के लिए सोलर लाइट भी लगी थी, लेकिन महीने बाद ही गांव फिर अंधेरे के आगोश में चला गया. गांव में पहुंचने के लिए हाईवे से पांच किलोमीटर तक जंगल का रास्ता कच्चा है. ऐसे में यहां बारिश में किसी वाहन का आना नामुमकिन हो जाता है. बारिश में कोई बीमार होता है, तो उसे खटिया पर डालकर हाईवे तक लाना पड़ता है. इसके बाद ग्वालियर तक का सफर होता है.
(रिपोर्ट-सुशील कौशिक)

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First published: October 3, 2019, 5:00 PM IST
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