अपना शहर चुनें

States

नाथूराम गोडसे का मंदिर लेकर कहां चली गई हिंदू महासभा?

नाथूराम गोडसे की मूर्ति.  (File Photo)
नाथूराम गोडसे की मूर्ति. (File Photo)

बीते साल हिंदू महासभा ने ग्वालियर में गोडसे का मंदिर बनाकर विवाद पैदा कर दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2018, 11:35 AM IST
  • Share this:
ग्वालियर देश के उन कुछ चुनिंदा इलाकों में से रहा है जहां 'हिंदुत्व' की राजनीति की शुरुआत हुई. जब ये इलाका मध्य भारत में था तो देश के पहले लोकसभा चुनावों में ग्वालियर सीट से हिंदू महासभा के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी. जीवाजी राव सिंधिया भी कांग्रेस विरोधी और हिंदू महासभा के समर्थक माने जाते थे. बीते साल हिंदू महासभा ने ग्वालियर में गोडसे का मंदिर बनाकर विवाद पैदा कर दिया था. News18Hindi ने ग्वालियर पहुंचकर ये जानने की कोशिश की कि गोडसे का मंदिर कहां गया और कितनी बची है हिंदू महासभा ?

ग्वालियर में मजबूत रही है हिंदुत्व की राजनीति
हिंदू महासभा और जनसंघ जैसे संगठनों को जीवाजी महाराज का समर्थन हासिल था क्योंकि ये संगठन उनकी राजशाही के कायम रहने के समर्थन में थे. 1951 के पहले लोकसभा चुनावों में यहां 11 सीटों पर चुनाव हुए जिनमें से 9 कांग्रेस जबकि सिंधिया परिवार के प्रभाव के चलते ही दो हिंदू महासभा के खाते में आई. 1952 में 99 सीटों पर पहले असेंबली इलेक्शन हुए, जिनमें 75 सीटों पर कांग्रेस जबकि 11 सीटों पर हिंदू महासभा ने जीत दर्ज की थी. ये वो समय था जब विधानसभा में हिंदू महासभा मुख्य विपक्षी दल था.

महात्मा गांधी की हत्या के साजिशकर्ताओं में नाम आने के बाद इसके ज्यादातर कार्यकर्ता जनसंघ में शामिल हो गए. हालांकि इस इलाके में हिंदू महासभा का प्रभाव बना रहा. इसी को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने साल 1957 में जीवाजी राव सिंधिया को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया. जीवाजी तो नहीं माने लेकिन उनकी पत्नी विजयाराजे सिंधिया गुना से कांग्रेस के टिकट पर लड़कर जीत गयीं. दूसरी बार राजमाता ने ग्वालियर से चुनाव लड़ा और हिंदू महासभा के कैंडिडेट को बड़े अंतर से हराया.
hindu mahasabha, gwalior, nathuram godse, mahatma gandhi, महात्मा गांधी हत्या, नाथूराम गोडसे, हिंदू महासभा, madhya pradesh election 2018, madhya pradesh vidhansabha chunav, MP election 2018, sc st act, BJP, Congress, upper caste protest in MP, Sapaks, Ajjaks, shivraj singh chauhan, jyotiraditya sindhiya, मध्य प्रदेश चुनाव 2018, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव, एमपी इलेक्शन 2018, एससी एसटी एक्ट विरोध, सवर्ण आंदोलन, सपाक्स , अजाक्स, दलित,



यह साथ 1966 तक ही चल पाया और विजयाराजे ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कारीरा विधानसभा से जनसंघ के टिकट पर जबकि गुना लोकसभा से स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. मौका देखते हुए जनसंघ ने विधानसभा में विजयाराजे को विपक्ष का नेता बना दिया. बाद में विजयाराजे ने कांग्रेस के बागी गोविन्द नारायण के साथ मिलकर डीपी मिश्र की सरकार को गिरा दिया. 20 महीने बाद ही गोविंद कांग्रेस में लौट गए. साल 1971 में इंदिरा गांधी ने प्रिवीपर्स ख़त्म कर दिया और राजघरानों को मिलने वाला वेतन बंद हो गया.

विजयाराजे इंदिरा के फैसले से काफी नाराज़ थी और इस दौरान उनके करीबी रहे हिंदूवादी नेता संभाजी राव आंगरे ने उन्हें बेटे माधवराव को राजनीति में ले आने की सलाह दी. आंगरे की सलाह पर ही माधवराव को जनसंघ की सदस्यता दिला दी गई. 26 साल के माधवराव ने गुना सीट से कांग्रेस के सीनियर लीडर देशराज जाधव को डेढ़ लाख वोटों से हरा दिया. हालांकि माधवराव पिता जीवाजी की तरह हिन्दुत्ववादी राजनीति से इत्तेफाक नहीं रखते थे और यही उन्हें कांग्रेस तक ले गया. यहीं से माधवराव और विजयाराजे के संबंध ख़राब हो गए. मां से इस अलगाव के लिए भी माधवराव आंगरे को ही ज़िम्मेदार मानते थे.



आज कहां हैं हिंदू महासभा ?
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज से बात करने पर पता चलता है कि फ़िलहाल ग्वालियर में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नाम पर बाबूलाल चौरसिया उनके एक मात्र पार्षद हैं. हालांकि जयवीर यह दावा करते हैं कि समाज पर आज भी उनकी पकड़ है और उनके चलते ही ग्वालियर में सांप्रदायिक सौहार्द कायम है. उनके मुताबिक हिंदू महासभा के डर से मुसलमान कंट्रोल में रहते हैं जिससे अनहोनी नहीं हो पाती. वो बातचीत में बीते कई साल शहर में मुहर्रम के दौरान हुई हिंसक घटनाओं का भी विवरण देते हैं और बताते हैं कि कैसे मुसलमानों को मुंहतोड़ जवाब दिया गया था.

सवर्ण आंदोलन के मुद्दे पर जयवीर कहते हैं कि उनका संगठन हमेशा से ही आरक्षण का विरोधी है और आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग करता रहा है. वो बीजेपी-कांग्रेस पर आरोप लगाते हैं कि ये पार्टियां वोट बैंक के चक्कर में हिंदुओं को ही आपस में लड़ाने का काम कर रही हैं.



मंदिर वहीं बनाएंगे!
गोडसे का मंदिर कहां हैं इस सवाल के जवाब में जयवीर कहते हैं कि आगामी 15 नवंबर को गोडसे शहीदी दिवस पर उसकी स्थापना कर दी जाएगी. वो आगे कहते हैं कि गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या सिर्फ विभाजन में मारे गए 10 लाख हिन्दुओं की मौत का बदला लेने के लिए की थी. हमें गांधी से दिक्कत नहीं लेकिन हम सावरकरवादी हैं और इस धारा के महापुरुषों और शहीदों का सम्मान करना चाहते हैं.

बीजेपी से खासे नाराज़ नज़र आ रहे जयवीर सवाल उठाते हैं कि खुद को हिन्दुओं का हितैषी बता सरकार में आए लोग राम मंदिर और धारा 370 पर बात नहीं करना चाहते, इन्होंने सिर्फ हिंदुओं को ठगने का काम किया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज