Lockdown : भारी कदमों और उदास मन से घर लौट आए ये प्रवासी मज़दूर,पीछे छोड़ आए यादें
Gwalior News in Hindi

Lockdown : भारी कदमों और उदास मन से घर लौट आए ये प्रवासी मज़दूर,पीछे छोड़ आए यादें
प्रवासी मज़दूर स्पेशल ट्रेन से घर लौटे

ग्वालियर लौटे मजदूरों ने बताया कि पंजाब में उनका रजिस्ट्रेशन किया गया था, रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही उनको टिकट मिला. टिकट के एवज में उनसे कोई पैसा नहीं लिया गया.

  • Share this:
ग्वालियर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में श्रमिक स्पेशल ट्रेनों (labour special train)  के आने का सिलसिला जारी है. प्रदेश से बाहर रह रहे मज़दूरों का बड़ी तादाद में घर लौटने का क्रम चल रहा है. ये मज़दूर घर तो लौट आए हैं लेकिन बेहद भारी मन है. रोटी कमाने ये परदेस गए थे. जो थोड़ा-बहुत जोड़ा था वो सवा महीने के इस लॉकडाउन (lockdown) में खत्म हो गया.जब कुछ नहीं बचा तो घर लौटना इनकी मजबूरी थी.

ऐसी ही एक स्पेशल ट्रेन पंजाब में फंसे एमपी के मजदूरों को लेकर ग्वालियर पहुंची. लुधियान से आई ट्रेन में ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के करीब 1200 लोग सवार थे. ग्वालियर स्टेशन पर इनकी स्क्रीनिंग की गई. यहां से उन्हें खाने के पैकेज देकर बसों के जरिए गृह ज़िलों के लिए रवाना किया गया. गृहज़िलों में इन लोगों को 14 दिन तक कोरेंटीन किया जाएगा.

रेलवे स्टेशन पर स्क्रीनिंग
लुधियाना से एमपी के मजदूर और कामगारों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन ग्वालियर रेलवे स्टेशन पहुंची. स्पेशल ट्रेन के लिए स्टेशन पर रेलवे, जीआरपी, स्वास्थ और परिवहन विभाग का अमला तैनात था. प्लेटफार्म नंबर एक पर आई ट्रेन से सभी यात्रियों को सोशल डिस्टेंस के जरिए बाहर लाया गया. प्लेटफार्म पर तैनात स्वास्थ विभाग के अमले ने इन सभी मजदूरों की स्क्रीनिंग की. 1200 मजदूरों की स्क्रीनिंग के बाद भोजन के पैकेट दिए गए.
कामधंधा बंद, रुपया खत्म तो लौटना पड़ा


पंजाब में ग्वालियर-चंबल के लोग बड़ी तादाद में मजदूरी और अन्य संस्थानों में काम करते हैं .लॉक डाउन के दौरान लगभग 1200 मजदूर-कामगार फंसे हुए थे. सरकार की मदद से स्पेशल ट्रेन के जरिए ग्वालियर लाया गया. ग्वालियर पहुंचे मुकेश पाल ने बताया कि वो लुधियाना में चाट का ठेला लगाता है, लुधियाना में ही अपनी पत्नि और बच्चों के साथ किराए के मकान में रहता है. मार्च में लॉक डाउन हुआ तो काम धंधा बंद हो गया, पास में जो रुपया-पैसा था, वो परिवार का गुजारा करने में खत्म हो गया. आखिर लौटना पड़ा. छतरपुर का दिनेश जाटव कपड़ा फैक्ट्री में काम करता है, पत्नि और दो बच्चों के साथ लॉक डाउन में फंस गया, डेढ़ महीना बड़ी परेशानी में गुजरा, लेकिन अब अपने घर लौटना अच्छा लग रहा है.

मजदूरों से नहीं लिया गया टिकट का पैसा
लुधियाना से लौटे मजदूरों के पास रजिस्ट्रेशन कार्ड औऱ टिकट था. ग्वालियर लौटे मजदूरों ने बताया कि पंजाब में उनका रजिस्ट्रेशन किया गया था, रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही उनको टिकट मिला. टिकट के एवज में उनसे कोई पैसा नहीं लिया गया. रेलवे स्टेशन पहुंचने पर उनको टिकट निशुल्क दिया गया. भिंड निवासी राखी ने बताया कि पंजाब से उन्होंने पैदल लौटने की कोशिश की थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उनको पैदल आने से रोका और फिर ठेकेदार से भोजन की व्यवस्था कराई. लुधियाना से ट्रेन के ज़रिए आए इन परिवारों के साथ करीब दो सौ से ज्यादा बच्चे भी लौटे हैं. लॉक डाउन में फंसे बच्चे भी अपने घर वापसी को लेकर खुश नजर आए.

50 बसों से घर भिजवाए मजदूर
लुधियाना से लौटे 1200 मजदूर और कामगारों में ज्यादातर ग्वालियर-चंबल अंचल के रहने वाले हैं. वहीं बुंदेलखंड के टीकमगढ़, छतरपुर जिले के भी करीब 300 मजदूर श्रमिक स्पेशल में सवार होकर आए. ग्वालियर में परिवहन विभाग ने इन कामगारों को घर भेजने के लिए 50 बसें जुटाई थीं. दस्तावेज चैक कर मजदूरों को उनके गृह ज़िलों में भिजवाया गया. गृह ज़िलों में पहुंचने पर इन मजदूर और कामगारों को 14 दिन के लिए होम क्वारेंटीन किया जाएगा.

महाराष्ट्र से लौटे श्रमिक

महाराष्ट्र में औरंगाबाद में फंसे मध्य प्रदेश के 1223 मजदूरों को लेकर एक विशेष ट्रेन रायसेन के ओबेदुल्लागंज रेलवे स्टेशन पहुंची. सभी 1223 मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया.  मण्डीदीप की एक सामाजिक संस्था ने इन्हें खाने के पैकेट भी दिए. सभी मजदूरों को  अलग-अलग बसों से अपने अपने जिले भेजा गया. इस ट्रेन में 24 जिलों के मजदूर लौटे हैं.

(साथ में रायसेन से देवराज दुबे का इनपुट)

ये भी पढ़ें-

कमलनाथ सरकार के फैसलों पर CM शिवराज की नजर, तबादला उद्योग पर बैठेगी जांच!

मौसम के इस उतार चढ़ाव में गर्मी में होगी हल्की बूंदाबांदी, दूर भागी लू
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading