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ग्वालियर नगर निगम के 60 फीसदी अधिकारी हैं दागदार, भ्रष्टाचार का ये है रिकॉर्ड

नगर निगम अफसरों के खिलाफ   लोकायुक्त और EOW में जांच चल रही है.
नगर निगम अफसरों के खिलाफ लोकायुक्त और EOW में जांच चल रही है.

नवंबर महीने में ग्वालियर नगर निगम (Gwalior Municipal Corporation) के भ्रष्ट अफसरों की जानकारी के लिए एक आरटीआई (RTI) लगायी गयी थी. उसमें खुलासा हुआ है कि निगम के बड़े पदों पर बैठे ज़्यादातर अधिकारी भ्रष्ट हैं. इनकी जांच लोकायुक्त और ईओडब्लू में चल रही है.

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ग्वालियर. ग्वालियर (Gwalior) नगर निगम, अपने काम से ज़्यादा अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारण सुर्खियों में रहता है. हालत ये है कि ग्वालियर नगर निगम के 60 फीसदी आधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त और ईओडब्लू (EOW) में जांच चल रही है. इनमें से 42 से ज्यादा अफसर (Officer) ऐसे हैं, जो बड़े पदों पर हैं, इनमें पूर्व मेयर से लेकर कमिश्नर तक के नाम शामिल हैं.

ग्वालियर नगर निगम के 60% अधिकारी दागदार हैं. सुनकर इस पर एक बार में भरोसा नहीं होता. लेकिन ये सच है. दागदार लोगों की सूची में नगर निगम कमिश्नर से लेकर उपयंत्री तक शामिल हैं. इन सबके खिलाफ लोकायुक्त पुलिस और EOW में जांच चल रही है. ये खुलासा RTI में हुआ है. भ्रष्टाचार के इन मामलों में पिछले 8 साल में सिर्फ कुछ में ही कार्रवाई की गयी.

4 दिन पहले पकड़े गए सिटी प्लानर
ग्वालियर नगर निगम के सिटी प्लानर अफसर प्रदीप वर्मा को अभी 4 दिन पहले ही EOW की टीम ने 5 लाख की रिश्वत लेते पकड़ा. वर्मा ने एंटी माफिया कार्रवाई का डर दिखाकर बिल्डर से 50 लाख की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 15 लाख रुपए बिल्डर दे चुका था. उसके बाद बिल्डर ने इसकी शिकायत EOW में कर दी. ये पहला मामला नहीं है जब नगर निगम का कोई अफसर रिश्वत लेते पकड़ा गया है.
ये सिलसिला पुराना है


नवंबर महीने में ग्वालियर नगर निगम के भ्रष्ट अफसरों की जानकारी के लिए एक आरटीआई लगायी गयी थी. उसमें खुलासा हुआ है कि निगम के बड़े पदों पर बैठे ज़्यादातर अधिकारी भ्रष्ट हैं. इनकी जांच लोकायुक्त और ईओडब्लू में चल रही है. खास बात ये है कि लोकायुक्त के पास इन शिकायतों में तत्कालीन नगर निगम आयुक्तों से लेकर संपत्तिकर संग्राहक तक शामिल हैं. हैरत की बात तो यह है कि इनमें से अधिकांश मामलों में आज तक निगम की ओर से लोकायुक्त को जानकारी ही नहीं भेजी गई है.इन लोगों की शिकायत बीते कई साल से लोकायुक्त पुलिस के पास हैं. लेकिन नगर निगम अधिकांश मामलों में जांच के लिए लोकायुक्त को दस्तावेज नहीं दे रही है.

एक नज़र इधर
• महापौर समीक्षा गुप्ता आर्थिक सहायता के प्रकरणों में अनियमितताएं.

• विनोद शर्मा तत्कालीन आयुक्त अपचारी सेवक शशिकांत शुक्ला को नियम विरुद्ध आर्थिक लाभ पहुंचाया.

• राजेंद्र उपाध्याय भवन निर्माण में अनियमितताएं.

• मुकेश बंसल पार्क अधीक्षक पार्क विभाग में हुई अनियमितताएं.

• प्रदीप वर्मा उपयंत्री भवन निर्माण अनुमति में अनियमितताएं.

• देवेन्द्र सिंह चौहान उपायुक्त नामाकंन प्रकरणों में अनियमितताएं

• माधव सिंह पवैया कार्यपालन यंत्री लोकायुक्त को जानकारी भेजी जा चुकी है.

• प्रदीप श्रीवास्तव नोडल अधिकारी कंप्यूटाइज्ड शाखा में अनियमितताएं

• विनोद शर्मा तत्कालीन कार्यालय अधीक्षक जानकारी भेजी जा चुकी है.

• औवेस सिद्दीकी खेल अधिकारी खेल विभाग में अनियमत्तिाएं•

•आयुक्त नगर निगम निगम प्रशासनिक भवन में अनियमितताएं

• पार्क विभाग में अनियमितताएं इस मामले में अपर आयुक्त आरके श्रीवास्तव, अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान, के खिलाफ शासन स्तर पर जांच चल रही है

• आरएलएस मौर्य सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में अनियमितताएं

• राजेश परिहार, सत्येंद्र यादव, प्रेमकुमार पचौरी, प्रदीप चतुर्वेदी, की विभागीय कार्रवाई के लिए प्रशासक को प्रतिवेदन दिया गया है.

• योगेश श्रीवास्तव संपत्तिकर वसूली में प्रकरण अनियमितताएं.

• शिशिर श्रीवास्तव जनकार्य में अनियमितताएं

• दिनेश अग्रवाल, प्रेम पचौरी, केशवसिंह चौहान सड़क निर्माण में अनियमत्तिाएं

हद है भ्रष्टाचार की
ये वो नाम हैं, जिनके खिलाफ लोकायुक्त और EOW में कई तरह की अनियमितताओं की कई जांच चल रही हैं. खास बात ये है कि कांग्रेस, बीजेपी के शासनकाल में इन अधिकारियों पर संरक्षण देने का आऱोप लगी रही है, तो वहीं ग्वालियर के सांसद ओर पूर्व मेयर विवेक शेजवलकर कह रहे हैं शासन स्तर और सरकार को निगम में खुद हस्तक्षेप करना पड़ेगा,क्योंकि निगम में भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं.

चुनाव में मुद्दा बनेगा
अब नगरीय निकाय चुनाव बेहद करीब हैं. कभी भी तरीखों का ऐलान चुनाव आयोग कर सकता है. लेकिन इस बार नगर निगम के नेता पुरजोर तरीके से निगम के भ्रष्टाचार और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ झंडा उठाए हुए हैं.
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