मारपीट करने वाले छात्र को हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया से दूर रहने की शर्त पर दी ज़मानत
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मारपीट करने वाले छात्र को हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया से दूर रहने की शर्त पर दी ज़मानत
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा युवाओं को हिंसात्मक गतिविधियों से दूर रखने के लिए सृजन के कामों लगाया जाना चाहिए.

अदालत (court) ने छात्र को 5 पौधे (plant) लगाने का आदेश दिया और कहा उसे हर महीने उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रशासन को देनी होगी.

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ग्वालियर.ग्वालियर हाईकोर्ट (gwalior high court) ने मारपीट के एक मामले में जेल में बंद स्कूली छात्र (student) को अनोखी शर्त पर जमानत दी है. हाईकोर्ट ने भिंड में रहने वाले इस छात्र को 2 महीने तक फेसबुक, व्हाट्सएप सहित तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बाहर रहने, 5 पौधे लगाकर उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट देने की शर्त पर जमानत दी है.

तंबाकू की पुड़िया के लिए मारपीट
भिंड जिले के असवार गांव के रहने वाले एक 18 साल के छात्र को 24 जून को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था. लॉकडाउन के दौरान हरेंद्र ने असवार गांव के एक दुकानदार से तम्बाकू पाउच मांगे थे. जब दुकानदार ने लॉक डाउन का हवाला देकर मना किया तो हरेंद्र ने दुकानदार के साथ बेरहमी से मारपीट की थी. इस मारपीट में दुकानदार को गहरी चोट आयी थीं.जिस पर पुलिस ने कई धाराओं में हरेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

जेल में बंद था छात्र
गिरफ्तारी के बाद 24 जून से आरोपी छात्र जेल में बंद था. छात्र की तरफ से जमानत के लिए याचिका लगाई गई थी, जिसमें कहा गया था कि उसने हाल ही में 12वीं पास की है और वह प्री-एग्रीकल्चर टेस्ट की तैयारी कर रहा है, इस घटना के लिए उसे खेद है और वह इसके लिए प्रायश्चित करना चाहता है. छात्र ने अदालत से उसके करियर को देखते हुए जमानत देने की गुहार की था.



दो महीने सोशल मीडिया से बाहर रहो- हाईकोर्ट
इस केस में आरोपी छात्र की तरफ से पैरवी करने वाले युवा अधिवक्ता सुशांत तिवारी ने बताया कि हाईकोर्ट ने उसकी जमानत पर सुनवाई की और 50 हज़ार रुपए के बांड के साथ जमानत का महत्वपूर्ण आदेश दिया. अदालत ने आरोपी छात्र को 2 महीने तक फेसबुक, वॉट्सएप सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूर रहने की शर्त पर जमानत मंजूर की. साथ ही अदालत ने छात्र को 5 पौधे लगाने का आदेश दिया और कहा उसे हर महीने उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रशासन को देनी होगी.

कोर्ट ने ये भी कहा
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा युवाओं को हिंसात्मक गतिविधियों से दूर रखने के लिए सृजन के कामों लगाया जाना चाहिए.
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