दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराने पर महिला को तीन साल की सजा

ग्वालियर में एक महिला को दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराना महंगा पड़ गया. कोर्ट में अपनी बयान से पलटने पर महिला को तीन साल की सजा सुनाई है. महिला पर एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.

Mahesh Shivhare | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 26, 2018, 5:49 PM IST
दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराने पर महिला को तीन साल की सजा
जिला एवं सत्र न्यायालय, ग्वालियर
Mahesh Shivhare | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 26, 2018, 5:49 PM IST
ग्वालियर में एक महिला को दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराना महंगा पड़ गया. कोर्ट में अपनी बयान से पलटने पर महिला को तीन साल की सजा सुनाई है. महिला पर एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. कोर्ट ने महिला की उस अर्जी को स्वीकार नहीं किया जिसमें उसने कम से कम सजा की मांग की थी. तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद महिला ने आवेदन पेश किया कि वह आदेश की अपील करना चाहती है.महिला की ओर से तर्क दिया गया कि यह उसका पहला अपराध है. उसका एक बच्चा भी है, जो उसके भरोसे है. महिला होने के नाते उसे दंड न दिया जाए.लेकिन कोर्ट महिला की गुहार से नहीं पिघला और दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह सजा सुनाई. उसके बाद कोर्ट ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया.

इंदरगंज थाने में एक महिला ने मोहन सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था. महिला का आरोप था कि वह इंदरगंज में जा रही थी तभी मोहन सिंह आया और उसे अपने साथ अपनी फैक्ट्री पर ले गया. जब सभी कर्मचारी निकल गए तो उसने उसे कमरे में बंद कर दिया जिसके बाद उसके साथ मारपीट कर दुष्कर्म किया. महिला की शिकायत पर पुलिस ने मोहन सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर महिला के बयान दर्ज किए. जब मामला कोर्ट पहुंचा तो महिला अपने बयान से पलट गई.

यह तथ्य भी सामने आया कि महिला ने पूर्व में भी कुछ लोगों पर इस तरह के केस दर्ज कराए थे और कोर्ट में बयान पलटे थे. बयान से पलटने पर कोर्ट ने महिला के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया. महिला के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर किया गया. इसमें सरकारी वकील की ओर से कहा गया कि महिला ने झूठा केस दर्ज कराकर कानून का दुरुपयोग किया है. इस तरह के केस दर्ज कराने से समाज में गलत संदेश जा रहा है. इसलिए झूठा केस दर्ज कराने पर महिला को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए.
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