सांसद या महापौर...कौन सा पद छोड़ेंगे नेताजी, विपक्ष तैयार है चेयर रेस के लिए
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सांसद या महापौर...कौन सा पद छोड़ेंगे नेताजी, विपक्ष तैयार है चेयर रेस के लिए
ग्वालियर

मेयर और सांसद दोनों ही पद लाभ की श्रेणी में आते हैं. इसलिए एक पद उन्हें तुरंत छोड़ना होगा.नवंबर और सितंबर में नगरीय निकाय के चुनाव हो सकते हैं. ऐसे में कुछ वक्त के लिए सही, सबकी निगाहें मेयर की कुर्सी पर टिकी हुई हैं.

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लोकसभा चुनाव के बाद अब सबकी निगाहें ग्वालियर महापौर की कुर्सी पर आ टिकी हैं. वो इसलिए क्योंकि ग्वालियर के मेयर विवेक शेजवलकर ने, लोकसभा चुनाव लड़ा और अब वो सांसद हैं. एक व्यक्ति एक पद के कारण उन्हें एक पद छोड़ना होगा. ज़ाहिर है वो सांसद रहना ही पसंद करेंगे. लेकिन फिलहाल वो पार्टी के आदेश का इंतज़ार कर रहे हैं साथ ही मेयर पद से इस्तीफा देने के लिए विधिक राय ले रहे हैं.

कांग्रेस की मांग - कांग्रेस, मेयर कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार को लेकर फिर से अपनी आवाज़ बुलंद करने लगी है. वो निगम परिषद की बैठक बुलाकर मेयर से इस्तीफ़े की मांग कर रही है. ऐसे में अगर मेयर इस्तीफा देते हैं, तो राज्य सरकार किसी भी वरिष्ठ पार्षद को मेयर की कुर्सी पर बैठा सकती है. इसमें कांग्रेस के चांस सबसे ज़्यादा हैं.
सियासी हलचल -ग्वालियर नगर निगम की सियासत में एक बार फिर हलचल है. इस बार उथल-पुथल मेयर की कुर्सी को लेकर है. विपक्ष के नेता मेयर विवेक शेजवलकर पर इस्तीफा देने के लिए दबाव बना रहे हैं. विपक्ष का कहना है ग्वालियर के मेयर विवेक शेजवलकर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे काम किए हैं, जिनमें बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है.साथ ही उऩ्हें सूबे की सरकार ने पद से हटाने के साथ-साथ कई मामलों में नोटिस भी दिए हैं. विपक्ष ने निगम परिषद की बैठक भी कॉल की है. विपक्ष का कहना है मेयर को इतने गंभीर आरोपों के बाद स्वत: इस्तीफा दे देना चाहिए.
विपक्ष का हंगामा- नगर निगम में विपक्ष का हंगामा मेयर के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार को लेकर तो है ही, इसके साथ-साथ वो इसलिए भी इस्तीफा देने के लिए दबाव डाल रहा है क्योंकि निगम की 1956 धारा 21/2 के तहत राज्य सरकार को आधिकार होता है, कि कम समय में निगम के ही किसी पार्षद को मेयर की कुर्सी पर बैठा दें. अब क्योंकि शेजवलकर सांसद बन चुके हैं इसलिए उनका मेयर पद छोड़ना तय ही है.
विधिक सलाह-मेयर विवेक शेजवलकर विपक्ष के आरोपों से परेशान हैं. हालांकि उन्हें ये पद तो छोड़ना है ही. लेकिन उससे पहले वो विधिक जानकारों से राय ले रहे हैं. पार्टी आलाकमान के आदेश के बाद वो आख़िरी फैसला करेंगे.
लाभ का पद -मेयर और सांसद दोनों ही पद लाभ की श्रेणी में आते हैं. इसलिए एक पद उन्हें तुरंत छोड़ना होगा.नवंबर और सितंबर में नगरीय निकाय के चुनाव हो सकते हैं. ऐसे में कुछ वक्त के लिए सही, सबकी निगाहें मेयर की कुर्सी पर टिकी हुई हैं.



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