टॉयलेट के लिए घर के 17 सदस्यों से लड़ गई बहू, फिर यूं हुआ झगड़े का अंत
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टॉयलेट के लिए घर के 17 सदस्यों से लड़ गई बहू, फिर यूं हुआ झगड़े का अंत
हरदा जिले के एक परिवार में शौचालय बनने की एक अनोखी दास्तां

हरदा जिले के एक परिवार में शौचालय बनने की एक अनोखी दास्तां

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित बॉलीवुड फिल्म 'टॉयलेट-एक प्रेम कथा' में जिस तरह जया ने शौचालय के लिए अपने पति, परिवार और पूरे गांव से विद्रोह कर मामला कोर्ट तक पहुंचा दिया था, ठीक उसी प्रकार मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक वाकया सामने आया है.

हरदा शहर की रहने वाली अंजुम शादी के बाद जब अपने ससुराल पहुंची तो वहां शौचालय ना होने की शिकायत अपने ससुराल वालों से की. जिसके बाद अंजुम को एडजेस्ट करने की बात कह कर मामला टालने की कोशिश की गई. लेकिन अंजुम के शौचालय की मांग पर अड़े रहने के कारण विवाद इतना बढ़ गया कि मामला थाने तक पहुंच गया.

दरअसल, 17 सदस्यों के सयुंक्त परिवार में बहू अंजुम को पहले ही दिन से शौचालय की परेशानी से गुजरना पड़ा. परिवार बड़ा होने और एक ही शौचालय होने के कारण बहू और अन्य सदस्यों में शौचालय का विवाद बढ़ता गया. अंजुम ने ससुरालवालों से अपने लिए अलग शौचालय की मांग की. जिससे घर में विवाद बढ़ गया और बात-बात पर घर में झगड़ा होंने लगा. परेशान अंजुम ने हरदा थाने में शिकायत कर अपने पति और ससुरालवालों पर मारपीट का मामला दर्ज कराया.



मामला एक परिवार का होने की वजह से पुलिस ने बारीकी से जांच की. जिसमें विवाद का कारण बहू द्वारा शौचालय निर्माण की मांग करना निकला. पुलिस ने दोनों पक्षों को बैठाकर मामले का हल निकाला. और अंततः अंजुम के सास-ससुर एक नए शौचालय के निर्माण के लिए राजी हुए, जिसमें पुलिस भी आर्थिक मदद देने को तैयार हुई.
शौचालय निर्माण से खुश बहू अंजुम का कहना है कि अब घर में सब खुश हैं, क्योंकि पुलिस की वजह से उनका परिवार टूटने से बच गया. बहू अंजुम के खिलाफ भी थाने में शिकायत करने वाली अंजुम की सास नजमा भी अब खुश हैं. उनका कहना है कि पुलिस ने मामले में समझाइश और सहायता दी जिसके बाद बहू को शौचालय बनाकर दिया है.

हरदा थाने के हेड कांस्टेबल संजय ठाकुर और बहू अंजुम
हरदा थाने के हेड कांस्टेबल संजय ठाकुर और बहू अंजुम


वहीं इस मामले को सुलझाने और आर्थिक मदद करने वाले हरदा थाने के हेड कांस्टेबल संजय ठाकुर का कहना है कि जब यह मामला आया तब उन्होंने इसकी जांच-पड़ताल करना शुरू कर दी, और सामने आया कि, नया शौचालय बनाना ही समस्या का हल होगा. उन्होंने बताया कि, 20 दिनों तक परिजनों के बीच सहमति बनाई गई और शौचलय का निर्माण करवाया गया. आर्थिक मदद पर उन्होंने कहा कि एक बड़े परिवार को टूटने से बचाना ही उनका पहला उद्देश्य था.
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