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पेड़ों के 300 साल पुराने ग्रेट ग्रैंड फादर्स पीपल और बरगद को बचा लिया हंडिया वालों ने
Harda News in Hindi

Praveen Singh Tanwar | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 7, 2020, 6:52 PM IST
पेड़ों के 300 साल पुराने ग्रेट ग्रैंड फादर्स पीपल और बरगद को बचा लिया हंडिया वालों ने
हरदा में पीपल और बरगद के पेड़ को बचाने की मुहिम

पेड़ों के इन ग्रेट ग्रेंड फादर्स (Great grand fathers) के लिए गांव वालों में इतना प्यार है कि मजदूर (labours) भी बरगद-पीपल को बचाने की मुहिम में शामिल हुए और अपने काम की मजदूरी भी नहीं ले रहे हैं.

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हरदा. हंडिया में दो पुराने और बूढ़े हो चुके पेड़ (tree) बचाने के लिए सारे जतन किए जा रहे हैं. ये बरगद और पीपल (Banyan and Peepal) के पेड़ हैं जो 300 साल पुराने हो चुके हैं. नर्मदा किनारे लगे इन पेड़ों की जड़ों से मिट्टी हट गई थी और वो तिरछे हो रहे थे. लेकिन हंडियावालों ने इसे सूखने नहीं दिया.वो रोज आते हैं और पेड़ों की सेवा करते हैं. इस मुहिम में जिले के अफसर भी शामिल हैं.

पर्यावरण संरक्षण की मुहिम
हरदा जिले का हंडिया गांव पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में खामोशी से जुटा है. ना कोई हो-हल्ला ना प्रचार. बस अपने दो पुराने पेड़ों को बचाने की लगन. बरगद और पीपल के 300 साल पुराने पेड़, जिन्होंने इस गांव की कई पीड़ियों को छांव दी, वो गिरने की कगार पर पहुंच रहे थे. लेकिन गांव वालों ने इन्हें बचा लिया. नर्मदा नदी में इस साल आई भयावह बाढ़ इन पेड़ों के नीचे की मिट्टी अपने साथ बहा ले गई थी. जड़ों से मिट्टी हट गई थी. पेड़ लगातार टेढ़े हो रहे थे और कभी भी गिर सकते थे.

पूरा गांव जुटा पेड़ बचाने में

गांव वालों ने जब नर्मदा किनारे लगे बरगद और पीपल के इन पेड़ों की हालत को देखा तो उन्हें बचाने का प्रयास शुरू किए जाने का फैसला हुआ. सबसे पहले दोनों पेड़ों के आसपास एक दीवार बनाई गई और फिर इनकी जड़ों में मिट्टी डालने का काम शुरू किया गया. तहसीलदार से लेकर गांव की महिलाएं और मर्द सब आगे आए. तगाड़ी और गेंती उठाई और श्रमदान शुरू कर दिया.



पेड़ से जुड़ी हैं यादेंगांव वालों का कहना है यह पेड़ क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर है. बुज़ुर्ग लोग कहते हैं कि वे बचपन से इस पेड़ को देखते आ रहे हैं. इससे उनकी यादें जुड़ी हुई हैं. इसे बचाने के लिए श्रमदान के अलावा आर्थिक सहयोग भी वो करेंगे.

मजदूर नहीं ले रहे मजदूरी
पेड़ों के इस ग्रेट ग्रैंड फादर के लिए गांव वालों में इतना प्यार और भावनाएं हैं कि मजदूर भी इस मुहिम में शामिल हैं. वे अपने काम की मजदूरी भी नहीं ले रहे. मिट्टी के कटाव से गिर रहे पेड़ों के आसपास एक प्रोटेक्शन दीवार बनाई गई, जिसके निर्माण में लगे मजदूरों ने इस काम का पारिश्रमिक नहीं लिया.

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First published: February 7, 2020, 6:27 PM IST
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