पिता की अंतिम इच्‍छा पूरी करने के लिए बेटियों ने दी मुखाग्नि, 'रामलखन' बनीं मिसाल
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पिता की अंतिम इच्‍छा पूरी करने के लिए बेटियों ने दी मुखाग्नि, 'रामलखन' बनीं मिसाल
बेटियों ने पेश की मिसाल.

हरदा जिले (Harda District) के बालागांव के रहने वाले किसान विनोद गौर (Vinod Gaur) का उनकी बेटियों (आयुषी और मुस्‍कान) ने अंतिम संस्कार किया है.

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हरदा. मध्‍य प्रदेश के हरदा जिले (Harda District) में आज पिता की मौत के बाद समाज की रूढ़िवादी परम्पराएं तोड़ कर बेटियों ने बेटे होने का फर्ज निभाकर मुखाग्नि दी है, जो कि समाज के लिए एक मिसाल है. जिले के बालागांव के रहने वाले किसान विनोद गौर (Vinod Gaur) की लिवर की बीमारी से मौत हो गई थी. परिवार में बेटा न होने पर बेटियों ने आगे आकर पिता का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया. जबकि बेटियों के इस फैसले को परिवार के सदस्यों के साथ समाज के लोगों का भी साथ मिला. आपको बता दें कि गौर अपनी दोनों बेटियों (आयुषी और मुस्‍कान) को रामलखन कहते थे.

ये है पूरा मामला
हरदा के जिले बालागांव के रहने वाले पेशे से किसान विनोद गौर की लिवर की बीमारी से कल (रविवार) को मुंबई में मौत हो गई थी. मृतक गौर लम्बे समय से लिवर की बीमारी से पीड़ित थे और कुछ दिन पहले ही इलाज के लिए मुंबई के ज्यूपिटर हॉस्पिटल गए थे. डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखकर परिजनों को उनका लिवर ट्रांसप्लांट करने की बात कही थी, लेकिन लिवर ट्रांसप्लांट के पहले ही विनोद गौर का निधन हो गया. आज उनका शव हरदा शहर की इंद्रलोक कॉलोनी स्थित उनके घर निवास पर लाया गया, जंहा परिजनों और रिश्तेदारों के बिच अंतिम क्रिया सम्पन्न कराने की बात सामने आई. जबकि गौर की दोनों बेटियों आयुषी और मुस्कान ने पिता की इच्छानुसार उनका अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया. उनके इस साहसी फैसले पर परिजनों ने और समाज के लोगो ने भी सहमति जताई. दोनों बेटियों ने पिता का अंतिम संस्कार नर्मदा किनारे किया. समाज के सभी लोगों ने बेटियों के इस फैसले का फैसले का समर्थन किया. विनोद गौर की बड़ी बेटी आयुषी गौर जो कि मेडिकल स्टूडेंट ने कहा कि आज दोनों बहनों ने बेटा बनकर पिता को मुखाग्नि दी. उनके इस फैसले से उनकी मां किरण गौर और परिवार के सभी लोग खुश हुए हैं.

दोनों बेटियों को पिता कहते थे रामलखन
मृतक विनोद गौर की बड़ी बेटी आयुषी ने न्यूज़ 18 से कहा कि उनके पिता हमेशा बहनों को अपनी बेटी बेटा मानते थे. उनके पिता दोनों बेटियों को रामलखन कहते थे, इसलिए आज पिता की मौत के बाद उन्होंने राम बन कर बड़े बेटे होने का फर्ज निभाया है. आयुषी ने कहा कि समाज में बेटियों को लेकर बहुत प्रॉब्लम होती हैं. बेटे और बेटियों में तुलना की जाती है, इसलिए उन्होंने पिता को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया. ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विनोद गौर ने दोनों बेटियों को पढ़ाने के लिए गांव के अलावा हरदा शहर में भी घर लिया था. बेटियों को आगे बढ़ाने की चाह में विनोद गौर ने उन्‍हें उच्च शिक्षा के लिए बाहर भी भेजा. विनोद गौर की बड़ी बेटी आयुषी भोपाल के RKDF मेडिकल कालेज में थर्ड ईयर की छात्रा है. जबकि छोटी बेटी मुस्कान इंदौर में बीबीए फॉरेन ट्रेड की छात्रा है. साथ ही अभी कुछ दिन पहले ही मुस्कान का एचडीएफसी बैंक में भी चयन हुआ है.



दो तीन बाद होने वाला था ट्रांसप्लांट
विनोद गौर लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे. मुंबई में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने जब लिवर ट्रांसप्लांट की बात कही तो विनोद गौर की पत्नी अपने पति को जीवनदान देने के लिए आगे आयी और अपना लिवर देने का फैसला किया. हालांकि अचानक विनोद गौर को पीलिया हो जाने से डॉक्टरों ने दो तीन दिन बाद लिवर ट्रांसप्लांट की बात कही, लेकिन उसके पहले ही उनकी मौत हो गयी. विनोद के छोटे भाई अशोक गौर ने कहा कि दोनों बेटियों ने जो निर्णय लिया उसमें पूरे परिवार की सहमति थी. साथ ही जिला गौर समाज की सामूहिक विवाह समिति के सचिव अरुण गौर ने न्यूज़ 18 को कहा कि दोनों बेटियों ने पिता का पुत्र बनकर फर्ज निभाया है, उससे परिवार ही नहीं बल्कि पूरा समाज गौरवान्वित है.

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