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Madhya Pradesh की अनूठी ग्राम पंचायत, ग्रामीणों ने आज तक सरपंच के लिए नहीं किया मतदान

Madhya Pradesh की अनूठी ग्राम पंचायत, ग्रामीणों ने आज तक सरपंच के लिए नहीं किया मतदान

Harda News: हरदा जिले के ग्राम पंचायत बूंदड़ा में ग्रामीण आपसी सहमति से सरपंच चुनते हैं.

Harda News: हरदा जिले के ग्राम पंचायत बूंदड़ा में ग्रामीण आपसी सहमति से सरपंच चुनते हैं.

MP Unique Gram Panchayat Bundra: मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (Madhya Pradesh Panchayat Chunav) के पहले चरण के लिए नामांकन शुरू हो चुका है. मध्य प्रदेश में एक ऐसी ग्राम पंचायत है जहां पिछले तीन दशक से पंचायत चुनाव के लिए मतदान नहीं हुआ. मंदिर में बैठकर सरपंच या पंच आपसी तालमेल से चुना जाता है. हरदा जिले के ग्राम पंचायत बूंदड़ा (Bundra Gram Panchayat) में ग्रामीण आपसी सहमति से सरपंच चुनते हैं. यही कारण है कि पंचायत गठन के तीन दशक बीत गए, लेकिन इस गांव में कभी पंचायत चुनाव के लिए मतदान नहीं हुआ.

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    प्रवीण तंवर.

    हरदा. मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (Madhya Pradesh Panchayat Chunav) का आगाज हो चुका है. पहले चरण के लिए नामांकन भी शुरू हो चुका है. आज हम आपको मध्य प्रदेश की ऐसी ग्राम पंचायत के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पिछले तीन दशक से पंचायत चुनाव के लिए मतदान नहीं हुआ. ऐसी ग्राम पंचायत हरदा जिले में हैं, जहां पंचायत चुनाव में सरपंच या पंच मंदिर में बैठकर आपसी तालमेल से चुना जाता है. सुनने में थोड़ा अविश्वनीय है पर यह सच है. ग्राम पंचायत बूंदड़ा
    (Bundra Gram Panchayat) में ग्रामीण आज भी सरपंच आपसी सहमति से चुनते हैं. यही कारण है कि पंचायत गठन के तीन दशक बीत गए, लेकिन इस गांव में कभी पंचायत चुनाव के लिए मतदान नहीं हुआ.

    ग्राम पंचायत बूंदड़ा का गठन 1993 में हुआ था, तभी से पंचायत में निर्विरोध सरपंच चुना जाता है. पंचायत गठन के पहले बूंदड़ा दूसरी पंचायत में मर्ज था. उस समय भी गांव वाले निर्विरोध सरपंच चुनते थे. गांव में लगभग 1200 से ज्यादा मतदाता है. पंचायत चुनाव आने पर पहले ग्रामीण मंदिर में बैठते हैं, जहां आरक्षण के आधार गांव के व्यक्ति के नाम पर सरपंच पद के लिए सहमति बनती है. चुनाव के समय नामांकन फार्म भरवाकर उसे निर्विरोध निर्वाचित किया जाता है.

    गांव के बुजुर्ग बताते है कि हमेशा निर्विरोध सरपंच चुना जाता है. आज यह परंपरा गांव की पहचान बन गई है. इस बात को लेकर गांव में कभी कोई विवाद नहीं होता है. भारत सरकार द्वारा पंचायत को हर बार पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि पुरस्कार स्वरूप देती है. 20 लाख रुपये की यह राशि गांव के विकास पर खर्च की गई है.

    2007 में ही खुले में शौच मुक्त हो गया था गांव
    गांव में स्वच्छता देखते ही बनती है. गांव में 2007 में ही खुले में शौच मुक्त हो गया था. हर घर में शौचालय है. सभी ग्रामीण दलगत राजनीति को भूलकर गांव के विकास पर चर्चा करते हैं. गांव के भूतपूर्व सरपंच रहे नारायण उइके बताते हैं कि सभी धर्म-जाति के लोग बारी बारी से सरपंच बनते हैं, इसलिए कोई मतभेद भी नहीं होते. गांव में समरसता का भोज का आयोजन वर्ष में एक बार होता है जिसमे सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करते है.

    गांव के युवा भी करते हैं आधुनिक खेती
    गांव के भगवानदास करोड़े बताते है कि गांव के युवा भी आधुनिक खेती करते हैं. गांव से पुलिस थाने में कोई रिपोर्ट नहीं होती है. कोई भी विवाद होता है तो उसे गांव में बैठकर सुलझाया जाता है. गांव के ही रहने वाले गौरी शर्मा कहते हैं कि पुरे प्रदेश में उनकी पंचायत अनोखी है. सभी लोग मिलकर रहते हैं. ग्राम बूंदड़ा के पंचायत सचिव राजेंद्र सिंह मौर्य ने कहा कि निर्विरोध निर्वाचन होने से गांव के विकास को गति मिलती है. बूंदड़ा में आज यह परपंरा बन गई है.

    Tags: Harda news, Madhya pradesh news, Madhya pradesh panchayat election 2020, Mp news

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