हरदा जिला अस्पताल में असामान्य बच्ची का जन्म : दोनों पैर उल्टे और पंजे पीठ की तरफ

बच्ची की देखभाल डॉक्टर्स कर रहे हैं. उसका बेहतर इलाज किया जाएगा.

Harda. च्ची बेहद कमजोर है. इसलिए एहतियात के तौर पर अभी उसके माता पिता को भी उसके पास नहीं आने दिया जा रहा. अस्पताल की नर्स उसकी देखभाल कर रही है.

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हरदा. हरदा (Harda) जिला अस्पताल में एक असामान्य बालिका का जन्म हुआ है. बच्ची के दोनों पैर घुटने के नीचे से उलटे हैं और पंजे पीठ की तरफ घूमे हुए हैं. जिला अस्पताल के डॉक्टर्स इसे दुर्लभ केस मान रहे हैं. फिलहाल बालिका एसएनसीएयू वार्ड में भर्ती है. कमजोर होने के कारण अभी उसे आइसोलेशन में रखा गया है, उससे किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा.

बच्ची बेहद कमजोर है. इसलिए एहतियात के तौर पर अभी उसके माता पिता को भी उसके पास नहीं आने दिया जा रहा. अस्पताल की नर्स की उसकी देखभाल कर रही है. बच्ची के परिवारवाले टकटकी लगाए बैठे हैं.

खिरकिया का है परिवार
खिरकिया ब्लॉक में रहने वाले एक मजदूर के घर ये बिटिया जन्मी है. डिलीवरी जिला अस्पताल में हुई. उसका वजन भी सामान्य बच्चो से कम है. साथ ही उसके पैर उल्टे हैं. डिलीवरी होने के बाद बालिका का वजन 1 किलो 600 ग्राम है. बच्ची के परिवार वाले अस्पताल में दूसरे वार्ड में रह रहे हैं.

परिवार बेटी को देखने के लिए बेचैन
बालिका की दादी ने कहा उनकी छोटी बहू के ये बिटिया हुई है. हम इसे पालेंगे और इसका इलाज कराएंगे. अभी मां को भी बच्ची से नहीं मिलने दिया जा रहा इसलिए वो भी अपनी बेटी से मिलने के लिए बेचैन हैं.

 क्या कहते है एक्सपर्ट-
जिला अस्पताल में नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ सन्नी जुनेजा ने कहा बालिका जन्म के बाद से कमजोर है. इस तरह के बच्चों को जन्म के बाद आइजीयूआर कहते है जिनका मां के गर्भ में ठीक से विकास नहीं होने के कारण इस तरह का विकार हो जाता है. मेडिकल फील्ड् में अपनी तरह के इस अनोखे मामले में बच्ची के पैर घूमे हुए हैं. क्लब फूट बीमारी में पैर सीधे होते हैं और घूमे हुए होते हैं. लेकिन इस मामले में थोड़ा अलग है. बच्ची को इंफेक्शन का खतरा होने के कारण अभी माता पिता से अलग रखा गया है. शासन की ओर से बच्ची का इलाज किया जाएगा.

सरकार कराएगी इलाज
हरदा जिला अस्पताल के एसएनसीयू प्रभारी डॉ दीपक दुगाया ने बताया कि यह दुर्लभ मामला है. आजकल सरकार ने सरकारी अस्पतालों में नवजात शिशु में जन्मजात विकृतियों के लिए समय पर निशुल्क इलाज की व्यवस्था की है. जिसमें इस तरह की विकृति का इलाज संभव है. जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क किया गया है. अभी उनकी रिपोर्ट नहीं आयी है.

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