काम के बहाने ले गए एमपी के आदिवासियों का कर दिया ये हाल

मध्य प्रदेश के हरदा जिले से आदिवासी मजदूरों को महाराष्ट्र के शोलापुर में काम के बहाने ले जाकर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है
मध्य प्रदेश के हरदा जिले से आदिवासी मजदूरों को महाराष्ट्र के शोलापुर में काम के बहाने ले जाकर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है

मध्य प्रदेश के हरदा जिले से आदिवासी मजदूरों को महाराष्ट्र के शोलापुर में काम के बहाने ले जाकर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है

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मध्य प्रदेश के हरदा जिले से आदिवासी मजदूरों को महाराष्ट्र के शोलापुर में काम के बहाने ले जाकर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है.

दरअसल, जिले के आदिवासी अंचल के लगभग 70 मजदूरों को मजदूरी करने महाराष्ट्र के सोलापुर गए थे. वहां काम के बदले रूपये मांगने पर मजदूरों से पिटाई की जाती थी. पिटाई करने व भूखा रखने पर 45 मजदूर भागकर हरदा आ गए. जिले के सिराली थाने पहुंचे मजदूरों की शिकायत पर तीन लोगों पर मामला दर्ज किया गया है. पीड़ित मजदूरो में 12 नाबालिग मजदूर शामिल हैं.

जिले के आदिवासी गावों में काम नहीं होने से बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण अन्य प्रदेशों में ले जाया जा रहा है. बाहर काम दिलाने के लिए जिले में एजेंट सक्रिय है जो भोले भाले आदिवासियों को पैसे का लालच देकर ले जाते हैं.



जिले के ग्राम मुड़ासेल, बिचपुरी माल और भगवानपूरा से 70 मजदूरों को काम करने के लिए महाराष्ट्र के शोलापुर ले जाया गया था. जिले के भवरदी गांव में रहने वाले एजेंट चेतराम और महेश सभी ग्रामीणों को महारष्ट्र ले गए थे. शोलापुर में जयहिंद शुगर मिल में सभी मजदूर गन्ने काटने का काम करते थे. जब 20 दिन गुजर गए और मजदूरी के पैसे मांगे तो मिल संचालको ने गन्ने से ही महिलाओं की पिटाई करवा दी. भूख और प्रताड़ना से परेशान मजदूर भागकर हरदा जिले के सिराली ठाणे पहुंचे.
सभी मजदूरों को तीन सौ रूपये प्रतिदिन मजदूरी देने की बात हुई थी. पर काम करने के बाद भी पैसे नहीं दिए जा रहे थे. पीड़ित मजदूरों में शामिल एक महिला ने बताया की रोज मारपीट की जा रही थी, जो राशन ले गए थे वह भी खत्म हो चुका था.

एक आदिवासी युवक ने बतया की वह गेजुएट है पर काम नहीं मिलने पर मजदूरी करनी पड़ती है. सभी के साथ वह भी शोलापुर गया था. सुबह से रात तक काम करवाया जाता था. गांव से उन्हें ले जाते समय पांच पांच सौ रूपये दिए गए थे. पर बाद में काम करवाने के बाद उनकी नियत बदल गयी और पैसे नहीं मिले.

सभी मजदूर इतने डरे हुए थे की पुलिस के पास नहीं जा रहे थे. जब इस बात की सूचना समाजसेवी अभिजीत शाह को लगी तो वे गांव पहुंचे और अपने खर्च पर सभी मजदूरों को गांव से सिराली पहुंचाया.

(हरदा से प्रवीन)
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